सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी जिले में पुलिस ने देशविरोधी गतिविधियों की साजिश रचने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय से प्राप्त इनपुट और खुफिया एजेंसियों की सूचना के आधार पर की गई। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को पूछताछ और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मो. अखलाक और मो. अरमान के रूप में हुई है। दोनों सीतामढ़ी जिले के गाढ़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत टकोर गांव के निवासी हैं। इस संबंध में गाढ़ा थाना में मामला दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
कटिहार में दर्ज केस से खुला मामला
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे मामले की कड़ी कटिहार जिले से जुड़ी हुई है। सबसे पहले कटिहार के कोढ़ा थाना क्षेत्र में इस मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के दौरान कटिहार पुलिस ने मो. अहद नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सीतामढ़ी के दोनों आरोपियों की भूमिका सामने आई, जिसके बाद सीतामढ़ी पुलिस ने छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
मोबाइल से मिले संदिग्ध डिजिटल साक्ष्य
तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए। प्रारंभिक डिजिटल जांच में मोबाइल फोन से कई संदिग्ध व्हाट्सएप ग्रुप, विदेशी मोबाइल नंबरों से संपर्क और पाकिस्तान स्थित संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े डिजिटल इनपुट मिलने का दावा किया गया है।
पुलिस का कहना है कि उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया देशविरोधी गतिविधियों की साजिश रचने और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने से जुड़े संकेत मिले हैं। हालांकि इन सभी पहलुओं की विस्तृत जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पाकिस्तान स्थित संदिग्ध नेटवर्क से संपर्क की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के माध्यम से पाकिस्तान में मौजूद एक संदिग्ध व्यक्ति राणा हसनैन उर्फ राणा हुसैन के संपर्क में थे। आरोप है कि बातचीत के लिए व्हाट्सएप की वन-टाइम ऑडियो कॉल सुविधा का इस्तेमाल किया जाता था।
इस फीचर की खासियत यह होती है कि कॉल समाप्त होने के बाद उसका रिकॉर्ड स्वतः डिलीट हो जाता है, जिससे बातचीत का सामान्य रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं रहता। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कॉल और चैट के माध्यम से किस प्रकार की सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया।
गृह मंत्रालय की निगरानी में चल रही जांच
सूत्रों के मुताबिक यह मामला संवेदनशील होने के कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय की निगरानी में है। जांच में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) भी समन्वय बनाकर काम कर रही हैं।
कटिहार में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ से कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद सीतामढ़ी में कार्रवाई की गई। फिलहाल बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
अन्य संदिग्धों की तलाश जारी
पुलिस का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस कथित नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों और संभावित नेटवर्क की विस्तृत पड़ताल में जुटी हुई हैं।