तिरहुत स्नातक MLC चुनाव में हार के बाद NDA के अंदर सियासी घमासान तेज हो गया है। अभिषेक झा ने अपनी हार के पीछे गठबंधन के भीतर रचे गए चक्रव्यूह की ओर इशारा किया है। उन्होंने खुद की तुलना अभिमन्यु से करते हुए करीब 4700 मतपत्र अमान्य किए जाने का दावा किया। उधर, JDU सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने सहयोगी दलों के कुछ नेताओं पर भीतरघात का आरोप लगाया, तो रीगा के BJP विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने NDA की एकजुटता का बचाव करते हुए पलटवार कर दिया।
बिहार की राजनीति में चुनावी हार के बाद अक्सर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होता है, लेकिन तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का मामला कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है। यहां मुकाबला भले ही चुनाव मैदान में था, लेकिन नतीजे आने के बाद असली सियासी लड़ाई गठबंधन के भीतर दिखाई देने लगी है। हार का ठीकरा किसके सिर फूटेगा, किसने साथ दिया और किसने भीतर ही भीतर रास्ता रोक दिया, इन सवालों ने NDA की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
तिरहुत स्नातक सीट से NDA प्रत्याशी रहे अभिषेक झा की हार के बाद तीन बड़े राजनीतिक चेहरों के बयान सामने आए हैं। अभिषेक झा ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट लिखकर अपनी पीड़ा जाहिर की। JDU सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने गठबंधन के कुछ नेताओं की नीयत पर सवाल उठाए। वहीं, भाजपा विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि NDA ने पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ा था।
अपने ही राजनीतिक परिवार में अभिमन्यु बन गए अभिषेक झा?
चुनाव परिणाम आने के बाद अभिषेक झा ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट साझा किया। पोस्ट की शुरुआत उन्होंने अपने समर्थकों, मतदाताओं और चुनाव में साथ देने वाले लोगों के प्रति आभार जताते हुए की। उन्होंने कहा कि भले ही परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया, लेकिन लोगों का प्यार और भरोसा उनके लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं है।
हालांकि, उनके पोस्ट का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा, जिसमें उन्होंने महाभारत के अभिमन्यु का जिक्र किया। अभिषेक झा ने सवाल उठाया कि क्या वह अपने ही राजनीतिक परिवार यानी NDA के भीतर रचे गए चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह अकेले पड़ गए थे?
उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर अभिषेक झा किस चक्रव्यूह की बात कर रहे हैं? क्या चुनाव के दौरान उन्हें अपने ही गठबंधन के कुछ नेताओं का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला? क्या पर्दे के पीछे कोई ऐसी राजनीतिक रणनीति तैयार की गई, जिसने उनकी जीत की राह मुश्किल कर दी?
अभिषेक झा ने इसे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और आत्ममंथन का विषय बताया है। हालांकि, उन्होंने किसी नेता का नाम लेकर सीधे तौर पर आरोप नहीं लगाया। उनका कहना है कि वह किसी के प्रति कटुता या द्वेष नहीं रखना चाहते। समय आने पर सच्चाई खुद सामने आ जाएगी।
4700 वोटों पर टिक का निशान, जीत-हार का गणित बदलने का दावा
अभिषेक झा ने अपनी हार को लेकर एक और बड़ा दावा किया है। उनके मुताबिक, करीब 4700 मतपत्रों पर उनके नाम के सामने टिक का निशान होने के कारण उन्हें अमान्य कर दिया गया। उनका मानना है कि यदि इन मतपत्रों को अमान्य नहीं किया जाता तो चुनाव का परिणाम कुछ और हो सकता था। यानी अभिषेक झा की नजर में हार की कहानी केवल राजनीतिक समर्थन की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि मतपत्रों की वैधता का सवाल भी इसमें महत्वपूर्ण है।
हालांकि, करीब 4700 मतपत्रों को अमान्य किए जाने का यह दावा फिलहाल अभिषेक झा की ओर से सामने आया है। इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि और चुनावी रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। यहां सवाल यह भी है कि क्या अमान्य मतपत्रों को लेकर कोई औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई गई है? क्या चुनावी प्रक्रिया में इस मुद्दे की जांच की मांग होगी? अगर यह दावा सही साबित होता है तो तिरहुत स्नातक चुनाव के परिणाम को लेकर बहस और तेज हो सकती है।
देवेश चंद्र ठाकुर ने किस पर लगाया भीतरघात का आरोप?
इस पूरे विवाद को हवा देने का काम JDU सांसद देवेश चंद्र ठाकुर के बयान ने किया। उन्होंने NDA के कुछ सहयोगी दलों के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों का हृदय साफ नहीं था। देवेश ठाकुर के मुताबिक, कुछ नेताओं को अभिषेक झा से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी, बल्कि असली निशाना वह खुद थे। उन्होंने इशारों-इशारों में अपनी राजनीतिक हैसियत और सामाजिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि शायद कुछ लोगों को यह बात पसंद नहीं आ रही थी कि कमजोर समाज से आने वाला व्यक्ति राजनीतिक रूप से इतना कद्दावर कैसे होता जा रहा है।
सांसद ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने कभी उनसे मदद ली, उन्हीं में से कुछ ने चुनाव में विरोध का रास्ता अपनाया। उनके बयान का सीधा मतलब यह निकाला जा रहा है कि गठबंधन के भीतर कुछ ऐसे चेहरे थे, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से NDA प्रत्याशी का समर्थन किया, लेकिन अंदरखाने उनका साथ नहीं दिया। हालांकि, देवेश चंद्र ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी सहयोगी दल के नेता या कार्यकर्ता से गठबंधन प्रत्याशी के खिलाफ काम करने अथवा वोट देने की अपील नहीं की थी।
बैद्यनाथ प्रसाद का पलटवार, बोले- NDA ने मिलकर लड़ा चुनाव
देवेश चंद्र ठाकुर के आरोपों पर रीगा के भाजपा विधायक बैद्यनाथ प्रसाद ने अलग ही तस्वीर पेश की। उन्होंने सांसद के बयान को उनके राजनीतिक कद के हिसाब से हल्का बताते हुए कहा कि NDA पूरी तरह एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरा था। बैद्यनाथ प्रसाद के मुताबिक, स्नातक और शिक्षक MLC चुनाव में गठबंधन के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिलकर काम किया। ऐसे में चुनावी हार के बाद भीतरघात का आरोप लगाना उचित नहीं है।
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पिछले MLC चुनाव में अभिषेक झा को करीब 10 हजार वोट मिले थे, जबकि इस बार उन्हें लगभग 20 हजार वोट प्राप्त हुए हैं। उनके अनुसार, यह NDA के नेताओं और कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है। भाजपा विधायक के इस बयान ने विवाद को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ सांसद देवेश ठाकुर गठबंधन के भीतर कुछ लोगों की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा विधायक चुनाव में NDA की सामूहिक मेहनत का दावा कर रहे हैं।
हार अभिषेक झा की, लेकिन सवाल पूरे NDA से!
तिरहुत स्नातक चुनाव के नतीजे के बाद अब मामला सिर्फ एक उम्मीदवार की हार और जीत तक सीमित नहीं रह गया है। अभिषेक झा का अभिमन्यु वाला बयान, देवेश चंद्र ठाकुर का भीतरघात का आरोप और बैद्यनाथ प्रसाद का पलटवार, तीनों मिलकर NDA के अंदरूनी समीकरणों की कहानी सामने ला रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर NDA पूरी तरह एकजुट था तो हार के बाद गठबंधन के भीतर इस तरह की बयानबाजी क्यों हो रही है? क्या चुनाव में जमीनी स्तर पर नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल की कमी थी या फिर राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने गठबंधन की एकजुटता को प्रभावित किया?
फिलहाल किसी पर भीतरघात का आरोप साबित नहीं हुआ है और अभिषेक झा के 4700 अमान्य मतपत्रों के दावे की भी आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है। लेकिन इतना जरूर है कि तिरहुत स्नातक चुनाव ने NDA के भीतर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।चुनाव में अभिषेक झा भले ही जीत का ताज नहीं पहन सके, लेकिन उनके एक सवाल ने गठबंधन के नेताओं को आमने-सामने ला खड़ा किया है- क्या चक्रव्यूह विपक्ष ने रचा था या अपने ही राजनीतिक परिवार के भीतर अभिमन्यु को अकेला छोड़ दिया गया था?