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Bihar Bridge Project: बिहार में 205 करोड़ की लागत से यहां बनने जा रहा आरसीसी पुल, सरकार ने दी मंजूरी; आर्थिक विकास को मिलेगा बल

Bihar Bridge Project: शिवहर के अदौरी और पूर्वी चंपारण के खोड़ीपाकड़ के बीच बागमती नदी पर 205 करोड़ रुपये की लागत से 3.2 किमी लंबा उच्चस्तरीय आरसीसी पुल बनेगा, जिससे दोनों जिलों की दूरी 25 किमी कम होगी और कनेक्टिविटी सुधरेगी।

23-Jan-2026 02:07 PM

By FIRST BIHAR

Bihar Bridge Project: शिवहर के पुरनहिया प्रखंड अंतर्गत अदौरी घाट और पूर्वी चंपारण के खोड़ीपाकड़ के बीच बागमती नदी पर उच्चस्तरीय आरसीसी पुल निर्माण का सपना अब साकार होने जा रहा है। पथ निर्माण विभाग ने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को स्वीकृति दे दी है। केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना निधि से लगभग 205.40 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पुल क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा।


इस परियोजना के तहत 3.2 किलोमीटर लंबा उच्चस्तरीय आरसीसी पुल एवं पहुंच पथ का निर्माण किया जाएगा। पुल के बन जाने से शिवहर और पूर्वी चंपारण के बीच की दूरी करीब 25 किलोमीटर कम हो जाएगी। वर्तमान में पुल के अभाव में लोगों को लंबा फेरा लगाकर यात्रा करनी पड़ती है।


पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से पुल निर्माण के लिए डीपीआर तैयार कर राशि उपलब्ध कराने की मांग की है। इस पुल की आवश्यकता को देखते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सीआईआरएफ के तहत डीपीआर तैयार कराने के निर्देश पहले ही दे दिए थे।


यह पुल दशकों पुरानी मांग रही है। आज़ादी के बाद से अब तक यह क्षेत्र की सबसे बड़ी बुनियादी मांगों में शामिल रहा है, जिसे लेकर कई बार लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी मुद्दा उठा। शिवहर के सामाजिक कार्यकर्ता संजय संघर्ष सिंह ने तो दिल्ली में संसद के सामने धरना देकर पुल निर्माण तक दाढ़ी नहीं कटाने का संकल्प लिया था, जो आज भी उनकी “संकल्प की दाढ़ी” के रूप में बनी हुई है। 


इस पुल के निर्माण से न केवल शिवहर बल्कि सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और पूर्वी चंपारण की राह आसान होगी। लोगों को एक नया वैकल्पिक मार्ग मिलेगा। एलपीजी, पेट्रोलियम उत्पाद, खाद-उर्वरक और उपभोक्ता सामग्री के परिवहन में सुविधा होगी। किसान अपने उत्पाद पड़ोसी जिलों और उत्तर प्रदेश तक आसानी से भेज सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर बाजार मिलेगा।


फिलहाल पुल के अभाव में लोग दूरी कम करने के लिए जान जोखिम में डालकर कमर भर पानी में बागमती नदी पार करने को मजबूर हैं। पुल निर्माण से यह जोखिम खत्म होगा और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति, व्यापार और लोगों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा।