समस्तीपुर: बिहार में शराबबंदी है… लेकिन शराब का कारोबार शायद नियम-कानून देखकर नहीं चलता। कोई बोतल छिपाकर ले जा रहा है, कोई बैग में भरकर, तो कोई अब AC First Class में बैठकर शराब की ‘शाही डिलीवरी’ के रास्ते पर निकल पड़ा है। समस्तीपुर में पकड़ी गई नेहा झा की कहानी कुछ ऐसी ही है।

दिल्ली से दरभंगा जा रही नेहा के पास एक-दो नहीं, बल्कि आठ ब्रीफकेस और दो बैग थे। आरोप है कि इन सामानों में करीब डेढ़ लाख रुपये की शराब भरी थी। साथ में उसकी बड़ी बहन का देवर ईशान कुमार भी था। दोनों AC First Class में सफर कर रहे थे।लेकिन पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद असली सवाल शराब की बोतलों से भी बड़ा हो गया—आखिर इतनी शराब लेकर नेहा दरभंगा क्यों जा रही थी?क्या ग्राहक पहले से तैयार थे? क्या घर-घर शराब पहुंचाने का नेटवर्क था?और क्या बड़े लोगों, यहां तक कि डॉक्टरों के घर तक भी शराब पहुंचाई जाती थी? इनमें से कई दावों की अभी पुलिस पुष्टि नहीं कर पाई है। लेकिन गांव में चल रही चर्चाओं और पुलिस को मिली सूचनाओं ने जांच का दायरा जरूर बढ़ा दिया है।

मां-बाप जेल गए… अब बेटी भी शराब के साथ पकड़ी गई

नेहा के परिवार का शराब से कथित कनेक्शन कोई बिल्कुल नई कहानी नहीं है। उसके पिता पंकज कुमार झा को करीब दो साल पहले सिंघिया पुलिस ने शराब से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अब बेटी नेहा भी शराब की बड़ी खेप के साथ गिरफ्तार हो गई।यानी सवाल सिर्फ यह नहीं कि नेहा शराब कहां से लाई?सवाल यह भी है कि क्या परिवार में पहले से मौजूद शराब तस्करी के संपर्कों का फायदा उसे मिला?क्या पुराने संपर्कों ने उसे इस कारोबार तक पहुंचाया?या फिर नेहा ने खुद दरभंगा में अपना अलग नेटवर्क खड़ा कर लिया?पुलिस इन सवालों की जांच कर रही है।

चार बहनें… दरभंगा कनेक्शन… और शराब के मामले

नेहा चार बहनों में सबसे छोटी है। वह समस्तीपुर के सिंघिया थाना क्षेत्र के बारी गांव की रहने वाली बताई गई है। उसकी एक बहन निशु झा को दरभंगा पुलिस शराब से जुड़े मामलों में दो बार गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।तीसरी बहन अंजू झा दरभंगा के एक डायग्नोस्टिक सेंटर में काम करती है। उसके खिलाफ शराब से जुड़ा कोई मामला सामने नहीं आया है।पुलिस के अनुसार, नेहा और उसकी बहनों के दरभंगा में किराए के मकान में रहने की जानकारी भी सामने आई है।अब जरा तस्वीर जोड़िए—परिवार का शराब केस…बहन का शराब मामले में जेल जाना…दरभंगा में रहना…और अब दिल्ली से शराब की बड़ी खेप लेकर नेहा का पहुंचना…क्या ये सिर्फ संयोग हैं?या फिर इनके पीछे कोई ऐसी कड़ी है जिसे पुलिस अब जोड़ने में लगी है?

‘डॉक्टरों के घर डिलीवरी’ का दावा, कितना सच?

इस केस में सबसे सनसनीखेज दावा ग्रामीणों की तरफ से सामने आया है। गांव के रहने वाले सुमित का कहना है कि नेहा की दरभंगा में कई बड़े और पैसे वाले लोगों से पहचान थी। दावा है कि वह शराब की डिलीवरी करती थी और कुछ डॉक्टरों के घर तक शराब पहुंचाने की बात भी कही जा रही है।लेकिन ठहरिए…यहां एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है।पुलिस ने अभी डॉक्टरों के घर शराब डिलीवरी के दावे की पुष्टि नहीं की है।यानी इसे फिलहाल आरोप, चर्चा या जांच के एक एंगल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।लेकिन अगर पुलिस की जांच में यह दावा सच साबित होता है तो मामला सिर्फ शराब तस्करी का नहीं रहेगा।फिर सवाल उन लोगों से भी होगा जो शराब खरीद रहे थे।कौन थे वो ग्राहक?क्या मोबाइल पर ऑर्डर मिलते थे?क्या घर तक शराब पहुंचाई जाती थी?पैसे कैश लिए जाते थे या ऑनलाइन?और क्या इस कथित नेटवर्क में कई लड़कियां शामिल थीं? पुलिस अब इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही है।

AC First Class में बैठकर ‘शराब का सफर’!

शराबबंदी वाले बिहार में शराब लेकर चलना ही कानून तोड़ना है। लेकिन यहां तो सफर का तरीका भी चर्चा में है। AC First Class!साथ में आठ ब्रीफकेस और दो बैग।यानी शराब का कारोबार भी जैसे ‘अपग्रेड’ हो गया हो।लेकिन सवाल यह है कि क्या नेहा को पुलिस की भनक लगने का डर नहीं था? या फिर उसे भरोसा था कि इतनी महंगी ट्रेन में सफर करने से कोई उस पर शक नहीं करेगा? प्लान चाहे जो रहा हो, समस्तीपुर में पुलिस की कार्रवाई ने पूरा खेल बिगाड़ दिया।

BTech इंजीनियर भी बना शराब की खेप का साथी

नेहा अकेली नहीं थी। उसके साथ ईशान कुमार भी गिरफ्तार हुआ है, जिसे BTech इंजीनियर बताया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्द ज्यादा पैसा कमाने के लालच में ईशान भी इस कथित कारोबार में शामिल हुआ।अब यह भी जांच का विषय है कि ईशान की भूमिका सिर्फ शराब की खेप साथ ले जाने तक थी या वह नेटवर्क के दूसरे लोगों से भी जुड़ा था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई से लेकर शराब की खेप तक का यह सफर आखिर कैसे तय हुआ? क्या लालच ने पढ़ाई और करियर पर भारी पड़ गया?या फिर किसी ने उसे इस खेल में इस्तेमाल किया?

क्या पहले भी दिल्ली से आती रही शराब?

जीआरपी इंस्पेक्टर बीरबल कुमार के मुताबिक, नेहा शराब के साथ पहली बार गिरफ्तार हुई है। हालांकि पुलिस को आशंका है कि वह इससे पहले भी दिल्ली से शराब की खेप दरभंगा ला चुकी हो सकती है।अगर यह आशंका सही निकलती है तो आठ ब्रीफकेस सिर्फ एक खेप नहीं, बल्कि किसी पुराने सिलसिले की एक कड़ी हो सकते हैं।तब जांच के सवाल भी बदल जाएंगे—दिल्ली में सप्लायर कौन है?दरभंगा में रिसीवर कौन है?शराब की कीमत कौन तय करता है? पैसे किस खाते में जाते हैं? और आखिर माल किन लोगों तक पहुंचता है? यही वह कड़ी है जिसे पुलिस जोड़ना चाहती है।

मोबाइल खोलेगा ‘शराब नेटवर्क’ का राज?

अब पुलिस की नजर नेहा और ईशान के मोबाइल फोन और कॉन्टैक्ट्स पर है। कॉल हिस्ट्री, चैट, ऑनलाइन पेमेंट और पुराने संपर्कों की जांच से पता चल सकता है कि यह सिर्फ एक यात्रा थी या इसके पीछे पहले से चल रहा कोई नेटवर्क।पुलिस को कुछ लड़कियों के भी इस कथित नेटवर्क से जुड़े होने की सूचना मिली है। हालांकि इसकी भी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जरूरत पड़ने पर पुलिस दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर सकती है।

अब असली सवाल—बोतलें पकड़ी गईं या पूरा ‘खेल’ भी खुलेगा?

फिलहाल नेहा झा और ईशान कुमार न्यायिक हिरासत में हैं। शराब बरामद हो चुकी है। आरोपी पकड़े जा चुके हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। क्योंकि आठ ब्रीफकेस शराब के साथ पुलिस के हाथ सिर्फ दो लोग लगे हैं… अब देखना यह है कि पूछताछ में कितने नाम सामने आते हैं। अगर डॉक्टरों और हाई-प्रोफाइल लोगों तक शराब पहुंचाने के दावे झूठे हैं तो जांच उन्हें खारिज करेगी। और अगर इनमें सच्चाई निकलती है तो सवाल और बड़ा होगा—शराबबंदी के बावजूद शराब का ‘होम डिलीवरी मॉडल’ आखिर किसके सहारे चल रहा था? मां-बाप का शराब केस, बहन का जेल जाना, बेटी का शराब की बड़ी खेप के साथ पकड़ा जाना और दरभंगा में कथित हाई-प्रोफाइल संपर्क…अब पुलिस की जांच तय करेगी कि यह सिर्फ एक परिवार की कहानी है या शराब के किसी बड़े नेटवर्क की वह परत, जिसे खुलने में अभी वक्त है।