समस्तीपुर: शराबबंदी वाले बिहार में शराब की तस्करी का खेल कितना बेखौफ है, इसकी एक और तस्वीर समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर सामने आई। फर्क बस इतना था कि इस बार शराब की खेप किसी ट्रक, पिकअप या कार में नहीं, बल्कि AC First Class के सफर में जा रही थी। साथ में थे आठ ब्रीफकेस और दो बैग… और दावा है कि इनमें करीब डेढ़ लाख रुपये की शराब भरी थी।
समस्तीपुर में आरपीएफ की कार्रवाई के बाद नेहा झा और उसके साथ मौजूद ईशान कुमार को गिरफ्तार किया गया। दोनों दिल्ली से दरभंगा जा रहे थे। अब पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि आखिर शराब की यह खेप दरभंगा में किसके लिए थी?लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है—क्या यह सिर्फ एक खेप थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था?
आठ ब्रीफकेस, दो बैग और शराब की खेप… आखिर मंजिल कहां थी?
शुक्रवार को दिल्ली से दरभंगा जा रही ट्रेन में नेहा झा और ईशान कुमार सफर कर रहे थे। दोनों AC First Class में बैठे थे। देखने में सफर आम यात्रियों जैसा था, लेकिन सामान की जांच के बाद कहानी बदल गई। आठ ब्रीफकेस और दो बैग से शराब बरामद होने की बात सामने आई। पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया।अब जरा सोचिए—इतनी बड़ी मात्रा में शराब लेकर कोई व्यक्ति दरभंगा क्यों जा रहा था? क्या यह निजी इस्तेमाल के लिए थी? या फिर इसके पीछे ग्राहक पहले से तय थे?यही सवाल अब पुलिस की जांच के केंद्र में है।
‘बड़े डॉक्टरों और पैसे वालों’ तक पहुंचाने का दावा… लेकिन सबूत कहां?
गांव के रहने वाले सुमित ने दावा किया है कि नेहा सिर्फ शराब लेकर दरभंगा नहीं जा रही थी, बल्कि वहां बड़े डॉक्टरों और पैसे वाले लोगों तक शराब पहुंचाने की तैयारी थी। हालांकि, यह दावा बेहद गंभीर है और पुलिस ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की है।अगर यह दावा गलत है तो इसकी सच्चाई भी जांच से सामने आनी चाहिए। और अगर इसमें जरा भी सच्चाई है, तो सवाल और बड़ा हो जाता है—शराबबंदी के बावजूद शराब आखिर किन लोगों तक पहुंच रही थी?क्या शराब तस्करी का बाजार सिर्फ आम ग्राहकों तक सीमित है? या फिर इसके खरीदारों में रसूखदार और हाई-प्रोफाइल लोग भी शामिल हैं? पुलिस अब नेहा के मोबाइल फोन, कॉन्टैक्ट्स और पुराने संपर्कों की जांच कर रही है। यही जांच इस कहानी की असली परतें खोल सकती है।
चार बहनें, दरभंगा कनेक्शन और शराब के पुराने आरोप
नेहा समस्तीपुर के सिंघिया थाना क्षेत्र के बारी गांव के वार्ड-12 की रहने वाली बताई गई है। परिवार में चार बहनें हैं। नेहा सबसे छोटी है। पुलिस और ग्रामीणों से सामने आई जानकारी के अनुसार, उसकी एक बहन निशु झा को दरभंगा पुलिस शराब से जुड़े मामलों में पहले भी गिरफ्तार कर चुकी है। दूसरी बहन अंजू झा दरभंगा के एक डायग्नोस्टिक सेंटर में काम करती है। उसके खिलाफ शराब से जुड़ा कोई मामला सामने नहीं आया है। तो फिर सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या दरभंगा में रहने और आने-जाने का सिलसिला महज पढ़ाई और नौकरी तक सीमित था, या इसके पीछे कोई और कनेक्शन भी था? फिलहाल इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही साफ होगा।
पिता भी शराब मामले में जा चुके हैं जेल
इस कहानी का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। नेहा के पिता पंकज कुमार झा को भी करीब दो साल पहले सिंघिया पुलिस ने शराब से जुड़े मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। यानी परिवार में पहले भी शराब मामले का पुलिस रिकॉर्ड सामने आ चुका है। लेकिन यहां भी सवाल है—क्या पुराने मामले और मौजूदा गिरफ्तारी के बीच कोई कड़ी है? क्या पुलिस पुराने केस की फाइल और नेहा के वर्तमान नेटवर्क को जोड़कर देख रही है? अगर पुलिस को पुराने और नए मामलों के बीच कोई लिंक मिलता है, तो जांच का दायरा और बड़ा हो सकता है।
NEET की तैयारी कर रहा भाई भी चर्चा में
नेहा के दो भाइयों की भी जानकारी सामने आई है। एक गांव में मैट्रिक की पढ़ाई कर रहा है, जबकि दूसरा इंटर के बाद सिंघिया में रहकर NEET की तैयारी कर रहा था। परिजनों के अनुसार, NEET में सफलता नहीं मिलने के बाद वह नशे की चपेट में आ गया और मुजफ्फरपुर के नशामुक्ति केंद्र में उसका इलाज भी चला। इस जानकारी का शराब तस्करी के मामले से कोई सीधा संबंध है या नहीं, यह जांच का विषय है। लेकिन यह परिवार की पृष्ठभूमि को समझने में जरूर एक अहम कड़ी हो सकती है।
BTech इंजीनियर ईशान भी कैसे पहुंचा इस खेल में?
नेहा के साथ गिरफ्तार ईशान कुमार को BTech इंजीनियर बताया गया है। पुलिस के अनुसार, वह जल्दी और अधिक पैसा कमाने के लालच में नेहा के साथ शराब की खेप लेकर जा रहा था। यहां भी सवाल सीधा है—एक इंजीनियरिंग पढ़ा युवक आखिर शराब की तस्करी के रास्ते पर क्यों गया? क्या लालच इतना बड़ा था कि कानून का डर पीछे छूट गया? या फिर इसके पीछे कोई ऐसा नेटवर्क था जो युवाओं को आसान और तेज कमाई का सपना दिखाकर अपने साथ जोड़ रहा था? इन सवालों के जवाब ईशान से पूछताछ के बाद सामने आ सकते हैं।
क्या दिल्ली से दरभंगा तक चलता था शराब का रास्ता?
पुलिस को आशंका है कि नेहा इससे पहले भी दिल्ली से शराब की खेप दरभंगा ला चुकी हो सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। अगर यह आशंका सही निकलती है तो मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी का नहीं रहेगा। फिर जांच का सबसे बड़ा सवाल होगा—दिल्ली से शराब कौन भेजता था? दरभंगा में कौन रिसीव करता था? पैसे का लेन-देन कैसे होता था? और सबसे अहम—ग्राहक कौन थे? क्या नेहा अकेली थी या उसके पीछे कई लोगों की टीम थी?क्या मोबाइल फोन में ऐसे नंबर मिलेंगे जो इस पूरे नेटवर्क का नक्शा तैयार कर दें?
‘होम डिलीवरी’ की चर्चा ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी है कि नेहा और उसकी बहनों का दरभंगा में शराब की होम डिलीवरी से जुड़ा नेटवर्क हो सकता है। पुलिस को कई लड़कियों के इस नेटवर्क से जुड़े होने की सूचना मिलने की बात भी सामने आई है। लेकिन फिलहाल ये सभी बातें दावे और पुलिस को मिली सूचनाओं के स्तर पर हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि अब पुलिस की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन या अन्य डिजिटल सबूत इस दावे की पुष्टि करते हैं, तो शराब तस्करी का पूरा नेटवर्क सामने आ सकता है।
अब असली ‘पोल’ पुलिस जांच खोलेगी
नेहा और ईशान को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस पुराने रिकॉर्ड और संपर्कों की जांच कर रही है। जरूरत पड़ने पर दोनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा सकती है। और यही पूछताछ तय करेगी कि कहानी सिर्फ आठ ब्रीफकेस और दो बैग की है, या इन ब्रीफकेस के अंदर छिपी शराब के साथ-साथ कोई बड़ा नेटवर्क भी सफर कर रहा था। कौन था असली सप्लायर? कौन था रिसीवर? क्या दरभंगा में पहले से ग्राहक तय थे? क्या होम डिलीवरी का नेटवर्क सच में मौजूद था? और क्या इस खेल में सिर्फ तस्कर शामिल थे या शराब खरीदने वालों की भी कोई लंबी सूची है? फिलहाल इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के पास हैं। क्योंकि शराब की खेप तो पकड़ी गई है… अब देखना यह है कि इस खेप के साथ पुलिस के हाथ पूरा नेटवर्क लगता है या कहानी गिरफ्तारी तक ही सिमट जाती है।