Samastipur Division Railway: रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर सिग्नलिंग सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा. रेल मंत्रालय ने इन स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) सिस्टम लगाने के लिए 233 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्टेशनों पर सिग्नलिंग से जुड़ा परिचालन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी.


मंडल के चयनित स्टेशनों पर वर्तमान में इस्तेमाल हो रही पैनल इंटरलॉकिंग व्यवस्था को हटाकर कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया जाएगा. इस तकनीक के जरिए सिग्नल, प्वाइंट और ट्रेन के रूट से जुड़े संचालन को अधिक सटीक तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा.


कवच के लिए भी मजबूत होगा सिग्नलिंग नेटवर्क

रेलवे के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम कवच के क्रियान्वयन के लिए भी महत्वपूर्ण है. स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए आधुनिक और भरोसेमंद सिग्नलिंग व्यवस्था जरूरी है. ऐसे में 21 स्टेशनों पर EI सिस्टम की स्थापना से कवच से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.


कंप्यूटर आधारित सिस्टम से बढ़ेगी विश्वसनीयता

पैनल इंटरलॉकिंग की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग आधुनिक कंप्यूटर आधारित तकनीक है. इसमें सिग्नल और प्वाइंट के संचालन के साथ ट्रेनों के रूट को अधिक सटीक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है. नई व्यवस्था से सिग्नलिंग उपकरणों की निगरानी और संचालन में भी सुधार होने की उम्मीद है.


इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम की मदद से तकनीकी खराबी का पता लगाने और उसे ठीक करने की प्रक्रिया भी तेज हो सकेगी. फॉल्ट डायग्नोसिस में लगने वाला समय कम होने से रखरखाव कार्य को अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा. इससे सिग्नलिंग सिस्टम की उपलब्धता और परिचालन विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद मिलेगी.


ट्रेनों के परिचालन में होगा सुधार

स्टेशनों पर सिग्नलिंग व्यवस्था मजबूत होने का असर ट्रेन परिचालन पर भी पड़ेगा. प्वाइंट और सिग्नल के संचालन में अधिक सटीकता आने से ट्रेनों के आवागमन को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा. इससे परिचालन में लचीलापन बढ़ाने के साथ रेल सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.


समस्तीपुर मंडल के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लगाने की योजना भारतीय रेलवे की सिग्नलिंग व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है. रेलवे लगातार पुराने सिग्नलिंग सिस्टम को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड कर रहा है, ताकि बढ़ते रेल यातायात के बीच सुरक्षित और भरोसेमंद ट्रेन परिचालन सुनिश्चित किया जा सके.