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26-Feb-2026 06:59 PM
By First Bihar
Bihar News: आज के समय में जब हम शादियों के बारे में सोचते हैं, तो दूल्हे को महंगी और शानदार गाड़ियों में सवार होते हुए ही देख सकते हैं। वहीं, बारातियों के लिए भी लक्जरी गाड़ियों का इंतजाम किया जाता है ताकि उस शादी का वर्चस्व और रौनक बनी रहे। लेकिन समस्तीपुर में एक ऐसी अनोखी शादी हुई, जिसके बारे में बात करने के बाद लोग आज भी चौंक रहे हैं।
यह शादी पूरी तरह से पारंपरिक और इको-फ्रेंडली थी, जिसमें न तो महंगी गाड़ियां थी और न ही डीजे का शोर। इस शादी में दूल्हा घोड़े पर सवार होकर आया और बारात के लिए बैलगाड़ी का इंतजाम किया गया था। यह दृश्य किसी पुराने समय की याद दिला रहा था, जब शादियां सादगी और परंपराओं के साथ होती थीं।
बैलगाड़ी की बारात ने किया आकर्षित
जैसे ही यह अनोखी बारात समस्तीपुर की सड़कों से गुजरी, लोग एक-दूसरे से कहने लगे कि यह दृश्य एक युग की परंपरा को पुनः जीवित करता है। देखते ही देखते इस बारात को देखने के लिए लोगों का तांता लग गया और वे तस्वीरें और वीडियो बनाने में व्यस्त हो गए। यह दृश्य 75 और 80 के दशक की शादियों की याद दिला रहा था, जब बैलगाड़ी और घोड़े का इस्तेमाल आम था।
शादी समस्तीपुर शहर के मगरदही घाट के रहने वाले 3 स्टार होटल के संस्थापक प्रदीप सेठ के बेटे आलोक की थी। उनकी शादी रोसड़ा की रहने वाली लड़की से तय हुई थी। इस अनोखी शादी को पारंपरिक तरीके से मनाने का निर्णय परिवार ने लिया था। यह शादी न केवल इको-फ्रेंडली थी, बल्कि इसमें पुराने समय की शादियों की सभी खासियतें शामिल थीं।
पारंपरिक लोक गीतों के साथ शादी का आयोजन
इस बारात की एक और खास बात यह रही कि इसमें बड़े-बड़े डीजे की बजाय पारंपरिक लोक गीत बजाए गए थे। बारात में शामिल सभी लोग इन लोक गीतों पर थिरकते हुए आगे बढ़ रहे थे। इसका उद्देश्य इस शादी को शहरी शोर से अलग और पर्यावरण के लिए सुरक्षित बनाना था।
बारात में कुल 35 बैलगाड़ी और 70 बैल मंगाए गए थे, और इन बैलगाड़ियों को भी विशेष रूप से सजाया गया था। बैलों को रंगकर सजाया गया था, जिससे यह बारात और भी रंगीन और आकर्षक बन गई। दूल्हे के लिए खासतौर पर एक घोड़ा सजाया गया था, जो इस शादी का मुख्य आकर्षण था।
पशु प्रेमी महेंद्र प्रधान का योगदान
इस शादी की थीम तैयार करने वाले प्रसिद्ध पशु प्रेमी महेंद्र प्रधान ने इस शादी के बारे में बताया। महेंद्र प्रधान सोनपुर मेला में पशुओं के साथ कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं और उनका मानना है कि ऐसी शादियां पर्यावरण के लिए फायदेमंद होती हैं। उन्होंने कहा, "आज लोग महंगी गाड़ियों में बारात जाते हैं, जिन्हें देखने वाला कोई नहीं होता, लेकिन बैलगाड़ी की बारात को देखने के लिए हजारों लोग एकत्रित हो गए। साथ ही यह पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त भी है।"
समस्तीपुर की इस अनोखी शादी ने सभी को एक नई दिशा दिखाई
समस्तीपुर में हुई इस शादी ने साबित कर दिया कि पुराने समय की परंपराओं को अपनाकर भी एक खूबसूरत और यादगार शादी की जा सकती है। जहां एक ओर आजकल की शादियां महंगी गाड़ियों और डीजे पर निर्भर होती हैं, वहीं इस शादी में पारंपरिकता और सादगी को महत्व दिया गया। दूल्हा घोड़े पर सवार था, बारात बैलगाड़ियों में आई, और पारंपरिक लोक गीतों ने शादी को एक अलग ही माहौल बना दिया।