Bihar Mid Day Meal Scam : सारण जिले में मध्यान्ह भोजन योजना (MDM) से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। स्कूली बच्चों के लिए भेजे गए चावल में भारी अनियमितता उजागर हुई है। जांच में खुलासा हुआ है कि करीब 800 क्विंटल चावल चोरी हो गया, जबकि 1100 क्विंटल चावल गोदाम में पड़े-पड़े सड़कर बर्बाद हो गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह मामला लगभग एक साल तक दबा रहा और अब जाकर विभागीय कार्रवाई शुरू हुई है।
जानकारी के मुताबिक, सारण जिले के मशरख और परसा प्रखंड में संचालित केंद्रीकृत रसोईघरों में एमडीएम योजना के तहत चावल का भंडारण किया गया था। इन्हीं गोदामों में रखे गए चावल की जांच के दौरान भारी गड़बड़ी सामने आई। जांच रिपोर्ट में पता चला कि बड़ी मात्रा में चावल गायब है और जो बचा था उसका एक बड़ा हिस्सा सड़ चुका है। इस खुलासे के बाद जिला मध्यान्ह भोजन कार्यालय और शिक्षा विभाग में अफरा-तफरी मच गई।
बताया जा रहा है कि पूरे मामले की जांच जिला मध्यान्ह भोजन कार्यालय की ओर से गोपनीय तरीके से थर्ड पार्टी एजेंसी से कराई गई थी। जांच रिपोर्ट आने के बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीर मानते हुए कार्रवाई शुरू कर दी। सक्षम प्राधिकार से मंजूरी मिलने के बाद मशरख और परसा स्थित केंद्रीकृत रसोईघर को आगे अवधि विस्तार देने से इनकार कर दिया गया है।
इस मामले में रसोईघर संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही संस्था “बाल विकास सेवा संस्थान” पर भी बड़ी कार्रवाई की गई है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, मध्यान्ह भोजन ने संस्था को 1900 क्विंटल चावल की राशि एक सप्ताह के भीतर ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करने का आदेश दिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संस्था की लापरवाही के कारण बच्चों के भोजन से जुड़ी योजना को भारी नुकसान पहुंचा है।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत चार अगस्त 2025 को हुई थी। उस दिन “बाल विकास सेवा संस्थान” की ओर से एमडीएम कार्यालय छपरा को एक आवेदन दिया गया था। आवेदन में बताया गया था कि एक अगस्त 2025 तक मशरख प्रखंड स्थित किचेन में लगभग 1894 क्विंटल चावल शेष होना चाहिए था। इसके बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई। जांच में खुलासा हुआ कि बड़ी मात्रा में चावल गायब है, जबकि काफी चावल खराब होकर अनुपयोगी हो चुका है।
मामले के सामने आने के बाद अब विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आखिर एक साल तक इतना बड़ा घोटाला कैसे दबा रहा, इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं हुई और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई — इन सवालों को लेकर शिक्षा विभाग घिरता नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भी इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकार बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन जिम्मेदार लोग ही योजनाओं में भ्रष्टाचार कर बच्चों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।फिलहाल विभागीय कार्रवाई तेज कर दी गई है और आगे कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी चल रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इस घोटाले में शामिल जिम्मेदार लोगों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है।