CHHAPRA: बिहार की राजनीति में एक बार फिर जातीय समीकरण और NDA के अंदरूनी मतभेद चर्चा में हैं। सारण से भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिहार में किसी राजपूत को किसी नेता पर भरोसा नहीं है।


 उन्होंने भाजपा नेतृत्व को यह तय करने की नसीहत दी कि पार्टी राजपूतों को कितना महत्व दे रही है और उनके कहने पर कोई दूसरा व्यक्ति अपनी बात मानने को कितना तैयार होगा।


छपरा में जिला प्रशासन के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह बातें कही। उनका यह बयान सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम को लेकर एनडीए में उठे विवाद के बीच आया है।


आनंद पुष्कर ने भाजपा नेतृत्व पर लगाए थे आरोप

दरअसल, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. राहुल राज की जीत और जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर की हार के बाद गठबंधन के भीतर बयानबाजी शुरू हो गई है। जदयू नेता आनंद पुष्कर ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर स्थानीय भाजपा नेतृत्व पर छल और साजिश का आरोप लगाया था।


उन्होंने सवाल उठाया था कि जब चुनाव में वोट मांगने की बारी आती है, तब नीतीश कुमार के विकास कार्यों को आगे रखकर समर्थन मांगा जाता है, लेकिन जब गठबंधन के समर्पित कार्यकर्ता और जदयू प्रत्याशी के साथ खड़े होने की बारी आती है तो गठबंधन धर्म कहां चला जाता है? क्या गठबंधन धर्म का पालन सिर्फ जदयू ही करेगी?


आनंद पुष्कर के आरोपों का रूडी ने दिया जवाब


आनंद पुष्कर के आरोपों को लेकर जब मीडिया ने राजीव प्रताप रूडी से सवाल किया कि क्या उनके कहने पर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान से हट सकते थे और एनडीए उम्मीदवार की जीत हो सकती थी, तो उन्होंने कहा कि बिहार में किसी राजपूत को किसी नेता पर भरोसा नहीं है।


रूडी ने इस बात पर भी सवाल खड़ा किया कि भाजपा को यह तय करना होगा कि वह राजपूतों को कितना महत्व दे रही है। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर राजपूत नेताओं की राजनीतिक भूमिका और प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है।


रूडी के बयान से एनडीए में नई चर्चा

राजीव प्रताप रूडी के इस बयान के बाद सारण से लेकर पटना तक सियासी हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जदयू नेता आनंद पुष्कर ने चुनाव में गठबंधन धर्म के पालन पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा सांसद रूडी ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व को कठघरे में खड़ा कर दिया है।


अब देखना होगा कि भाजपा नेतृत्व और एनडीए के दूसरे नेता इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और गठबंधन के भीतर उठे इन सवालों का क्या जवाब सामने आता है।