Saran Police Action: 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान सारण में हुई हिंसा और उपद्रव के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है. अब तक चार प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें 186 लोगों को नामजद और करीब 2500 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है. पुलिस ने अब तक 56 आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर 140 लोगों को बंधपत्र पर रिहा किया गया है.


पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक 196 लोगों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ और सत्यापन किया गया है. जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर 56 लोगों की गिरफ्तारी की गई. वहीं, जिन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत बंधपत्र पर छोड़ दिया गया.


वीडियो और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर हो रही कार्रवाई

सारण पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ केवल संदेह, अफवाह, सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट या किसी के मौखिक आरोप के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी. पुलिस की ओर से सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, डिजिटल साक्ष्य और तकनीकी जांच के आधार पर उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है.


पुलिस का कहना है कि जांच में जिन लोगों के खिलाफ हिंसा और उपद्रव में शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य मिलेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. वहीं, जिन लोगों के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलेगा, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी.


सीसीटीवी और मोबाइल वीडियो से उपद्रवियों की पहचान

25 जुलाई को हुई घटनाओं से जुड़े वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है. पुलिस इन फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है. जांच के दौरान सामने आने वाले नए साक्ष्यों के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं.


सरकारी वाहन और संपत्तियों को नुकसान

बिहार बंद के दौरान नगरपालिका चौक के पास तरैया थाना के सरकारी वाहन को क्षतिग्रस्त किए जाने की बात सामने आई है. इसके अलावा अन्य सरकारी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी है. प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन और सत्यापन कराया जा रहा है. जांच पूरी होने के बाद सरकारी संपत्तियों को हुए नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी.


करीब 20 पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल

हिंसक घटनाओं के दौरान करीब 20 पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए हैं. घायलों का इलाज कराया गया है. पुलिस की ओर से सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस और अधिकारियों पर हमला करने तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की भूमिका की अलग से जांच की जा रही है.