CHAPRA:बिहार में बेहतर स्वास्थ्य स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा सरकार करती है, लेकिन इसकी हकीकत क्या है, यह किसी से छिपी हुई नहीं है। ताजा मामला छपरा सदर अस्पताल से सामने आ रही है। जो सरकार के इस दावे पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांच के लिए मरीजों को कई दिनों तक सदर अस्पताल में भटकना पड़ रहा है।


रिविलगंज थाना क्षेत्र के सेमरिया गांव की रहने वाली संजू देवी पिछले कई दिनों से अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रही हैं। सोमवार की सुबह करीब 6 बजे ही वह ओपीडी पहुंच गईं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए पर्चा नहीं मिल सका। पीड़िता का कहना है कि पेट दर्द की शिकायत पर डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच लिखी थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह निजी जांच केंद्र पर नहीं जा पा रही हैं। 


उन्होंने कहा कि “हम कई दिन से आ रहे हैं, आज सुबह 6 बजे आए थे, लेकिन फिर भी नंबर नहीं मिला। बोले कि नंबर फुल हो गया, कल आइए। बताया जा रहा है कि सदर अस्पताल में ओपीडी सुबह 9 बजे से शुरू होता है, लेकिन अल्ट्रासाउंड के लिए मरीज सुबह 5 बजे से ही लाइन में लग जाते हैं। इसके बावजूद हर दिन सिर्फ 10 से 12 मरीजों का ही पर्चा बन पाता है।


वहीं, अल्ट्रासाउंड करने वाले चिकित्सक डॉ. उमेश सिंह द्वारा रोजाना करीब 25 से 30 मरीजों की ही जांच की जाती है, जबकि जरूरत 100 से अधिक मरीजों की होती है। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीजों को रोजाना निराश होकर लौटना पड़ता है।