BIHAR NEWS : पूर्वी चम्पारण जिले के सुगौली प्रखंड अंतर्गत दक्षिण छपरा बहास पंचायत से जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो ने स्थानीय प्रशासन और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में कथित तौर पर देखा जा रहा है कि लाभुकों को निर्धारित राशन देने के बजाय नकद रुपये दिए जा रहे हैं।
मिली जानकारी के अनुसार मामला दूसरे उतरी छपरा बहास पंचायत के मेहवा गांव का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में कुछ लोग पीडीएस मशीन पर अंगूठा लगाते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि फिंगरप्रिंट लेने के बाद लाभुकों को सरकारी राशन देने के बजाय पैसे थमा दिए जा रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार गरीबों के लिए मुफ्त या सस्ते दर पर राशन उपलब्ध करा रही है ताकि जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सके। लेकिन अगर राशन की जगह पैसे देकर खाद्यान्न की कालाबाजारी की जा रही है, तो यह गरीबों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से अनियमितता की शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन अब वीडियो वायरल होने के बाद मामला खुलकर सामने आया है।
कुछ ग्रामीणों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कई बार लाभुकों को पूरा राशन नहीं दिया जाता और मशीन पर अंगूठा लगवाकर रिकॉर्ड पूरा दिखा दिया जाता है। इस बार वीडियो वायरल होने से लोगों में प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
वायरल वीडियो के बाद पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग वीडियो साझा कर प्रशासन से जांच की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी पीडीएस दुकानदार और इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।
हालांकि इस मामले में अभी तक संबंधित विभाग या प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है। लोग इंतजार कर रहे हैं कि आखिर प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।