Water Park Controversy: मोतिहारी में किसानों के कब्जे वाली जमीन की जमाबंदी रद्द कर वहां वाटर पार्क निर्माण कराए जाने का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधान पार्षद खालिद अनवर ने भी जिला प्रशासन की कार्यशैली पर असंतोष जताया है।



खालिद अनवर ने कहा कि किसी को यह अधिकार नहीं है कि किसान की जमीन उसकी रजामंदी के बिना ले ली जाए। उन्होंने कहा कि बिहार में विकास के कार्य चल रहे हैं और किसी को विकास से आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि सरकार विकास परियोजना के लिए किसानों की जमीन ले रही है तो उन्हें उचित मुआवजा देना होगा। किसानों को संतुष्ट करने के बाद ही उनकी जमीन ली जानी चाहिए।



मोतिहारी के पिपराकोठी में किसानों की जमीन पर वाटर पार्क के निर्माण को लेकर किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल खालिद अनवर से मिला और उन्हें जमीन से संबंधित दस्तावेज दिखाए। दस्तावेज देखने के बाद खालिद अनवर ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि किसानों की जमीन लेने के मामले में जिला प्रशासन की ओर से जल्दबाजी की गई है।



उन्होंने कहा कि मामला अब न्यायालय में चला गया है, इसलिए आगे की प्रक्रिया कानूनी तरीके से होगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए सरकार में किसी भी किसान के साथ ज्यादती नहीं होने दी जाएगी।



वहीं, खालिद अनवर से मिलने पहुंचे किसानों ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन जबरन ले ली गई और इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया। किसानों ने अपनी जमीन और पूरे मामले से संबंधित दस्तावेज भी विधायक के समक्ष रखे।



अब देखने वाली बात यह होगी कि सत्ताधारी दल के विधान पार्षद खालिद अनवर किसानों की शिकायत को किस स्तर तक उठाते हैं और उन्हें न्याय दिलाने में कितनी भूमिका निभा पाते हैं। साथ ही, इस मामले में न्यायालय और जिला प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर भी सभी की नजरें टिकी हैं।

रिपोर्ट- सोहराब आलम, मोतिहारी