मोतिहारी: जिस स्कूल को बच्चों के भविष्य की नींव मजबूत करने का स्थान माना जाता है, अगर वहीं मासूम छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस करने लगें तो यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी जिले के लखौरा थाना क्षेत्र स्थित राजकीय मध्य विद्यालय बहुआरा से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसने अभिभावकों से लेकर स्थानीय लोगों तक को झकझोर कर रख दिया है।

विद्यालय के एक शिक्षक मो. साहिल पर छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं का कहना है कि शिक्षक लंबे समय से उनसे अशोभनीय, अभद्र और अश्लील बातें करते थे। इतना ही नहीं, वे ऐसी बातें पूछते थे और ऐसा व्यवहार करते थे जिससे छात्राएं मानसिक रूप से परेशान और भयभीत रहती थीं। मामला तब खुलकर सामने आया जब छात्राओं ने हिम्मत जुटाकर अपने परिजनों को पूरी घटना बताई।

छात्राओं ने खोली चुप्पी, परिवारों में फूटा गुस्सा

बताया जा रहा है कि कई छात्राएं काफी दिनों से शिक्षक के व्यवहार से परेशान थीं, लेकिन डर और संकोच के कारण कुछ नहीं कह पा रही थीं। आखिरकार उन्होंने अपने माता-पिता को बताया कि स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक उनसे लगातार गंदी बातें करते हैं, अश्लील शब्दों का इस्तेमाल करते हैं और ऐसा माहौल बना देते हैं जिससे वे स्कूल आने से भी डरने लगी थीं।

छात्राओं की आपबीती सुनते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में अभिभावक विद्यालय पहुंच गए और आरोपी शिक्षक के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। स्कूल परिसर में काफी देर तक हंगामा होता रहा और कार्रवाई की मांग की गई।

पुलिस ने आरोपी शिक्षक को हिरासत में लिया

मामले की सूचना मिलते ही लखौरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। स्थिति को नियंत्रित करने के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक मो. साहिल को हिरासत में ले लिया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और छात्राओं के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते छात्राएं आवाज नहीं उठातीं, तो मामला और गंभीर हो सकता था।

शिक्षा के मंदिर में भरोसा कैसे बचेगा?

यह घटना सिर्फ एक शिक्षक पर लगे आरोपों तक सीमित नहीं है। इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर्याप्त है? आखिर छात्राएं इतने दिनों तक डर के साये में क्यों पढ़ती रहीं? क्या विद्यालय प्रशासन को शिक्षक के व्यवहार की भनक नहीं लगी या फिर शिकायतों को नजरअंदाज किया गया? जिस शिक्षक के कंधों पर बच्चों को संस्कार और शिक्षा देने की जिम्मेदारी होती है, अगर उसी पर इस तरह के आरोप लगें तो समाज का भरोसा कैसे कायम रहेगा?

कई सवालों के जवाब बाकी

इस पूरे घटनाक्रम ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं— क्या स्कूल प्रशासन ने पहले कभी शिक्षक के व्यवहार की समीक्षा की थी? क्या छात्राओं ने पहले भी किसी शिक्षक या प्रधानाध्यापक से शिकायत की थी? अगर शिकायतें थीं तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्कूलों में छात्राओं की सुरक्षा और शिकायतों के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं? क्या शिक्षा विभाग अब केवल कार्रवाई की औपचारिकता करेगा या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच भी होगी?

अभिभावकों में डर और नाराजगी

घटना के बाद अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, न कि भय और मानसिक उत्पीड़न झेलने के लिए। अभिभावकों ने आरोपी शिक्षक पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में कोई भी शिक्षक अपनी जिम्मेदारी की मर्यादा न भूले।

जांच के बाद ही तय होगी सच्चाई

फिलहाल पुलिस ने आरोपी शिक्षक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। आरोप गंभीर हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल एक शिक्षक की व्यक्तिगत जवाबदेही का मामला होगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और सुरक्षा तंत्र पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न होगा। 

शिक्षा का मंदिर तभी पवित्र रह सकता है, जब वहां बच्चों का विश्वास और सुरक्षा दोनों सुरक्षित हों। यदि छात्राओं को अपने ही स्कूल में डर लगे, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। अब निगाहें पुलिस जांच और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होगी जो भविष्य में किसी भी मासूम छात्र या छात्रा के साथ ऐसी घटना दोबारा होने से रोक सके?