मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी में पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के मजुरहा गांव का है, जहां कथित तौर पर सादे लिबास में पैसे की वसूली कर रहे दो पुलिसकर्मियों को ग्रामीणों ने नकली पुलिस समझ लिया। इसके बाद देखते ही देखते मामला इतना बिगड़ा कि ग्रामीणों ने दोनों की जमकर पिटाई कर दी।

अब सवाल यह है कि आखिर पुलिस की पहचान ऐसी क्यों हो गई कि गांव वालों को असली और नकली पुलिस में फर्क ही नजर नहीं आया? और अगर दोनों पुलिसकर्मी वास्तव में वसूली कर रहे थे, तो क्या बिना वर्दी के ग्रामीण इलाकों में इस तरह की कार्रवाई का कोई नियम है?

सादे कपड़े में पहुंचे, वसूली का आरोप लगा और फिर शुरू हो गई पिटाई

बताया जा रहा है कि मजुरहा गांव में दो युवक सादे लिबास में पहुंचे थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक दोनों पैसे की वसूली कर रहे थे। गांव वालों को जब इनकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो उन्हें कथित तौर पर नकली पुलिस समझ लिया गया।इसके बाद देखते ही देखते मौके पर भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने दोनों युवकों को घेर लिया और उनकी पिटाई शुरू कर दी।मामला तब और गंभीर हो गया जब बाद में पता चला कि दोनों में से एक रोहित कुमार है और दूसरा भी पुलिस का जवान बताया जा रहा है। यानी जिसे ग्रामीण नकली पुलिस समझकर पीट रहे थे, वह कथित तौर पर असली पुलिसकर्मी निकले।अब सवाल फिर वही—अगर पुलिसकर्मी ही वर्दी के बिना वसूली करते नजर आएंगे तो आम आदमी पहचान करेगा कैसे?

डायल-112 ने पहुंचकर बचाई जान

मौके पर भीड़ बढ़ती चली गई। ग्रामीणों ने दोनों की जमकर धुनाई कर दी। स्थिति बिगड़ती देख डायल-112 की टीम को बुलाया गया। पुलिस टीम ने किसी तरह दोनों को भीड़ से बाहर निकाला।घटना के बाद इलाके में पुलिस की कार्यशैली और सादे लिबास में कथित वसूली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

ग्रामीणों का बड़ा आरोप- पुलिस के नाम पर कौन चला रहा वसूली का खेल?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्रामीण इलाकों में पुलिस के नाम पर वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा है। मजुरहा के वार्ड पार्षद पति राकेश सिंह समेत कई ग्रामीणों ने दावा किया कि सादे लिबास में पुलिस की गाड़ी पर बैठकर लोग कथित तौर पर पैसे की वसूली करते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर पुलिस की गाड़ी और पुलिस के नाम का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे लिए जा रहे हैं, तो इसकी भी गहन जांच होनी चाहिए।यानी मामला सिर्फ दो लोगों की पिटाई तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि पुलिस के नाम पर ग्रामीणों से वसूली का खेल कौन चला रहा है?

एसडीपीओ ने कहा- दोनों पर दर्ज होगा मुकदमा

मामले को गंभीरता से लेते हुए सदर एसडीपीओ दिलीप कुमार ने कार्रवाई की बात कही है। उनके अनुसार दोनों के खिलाफ रघुनाथपुर थाने में वसूली के मामले में मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई की जाएगी।हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस महकमे के सामने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।जब पुलिस ही सादे कपड़ों में वसूली के आरोपों में घिर जाए और ग्रामीण उसे नकली पुलिस समझकर पीट दें, तो आखिर भरोसा किस पर किया जाए? मोतिहारी की इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या वर्दी सिर्फ पहचान है या फिर पुलिस की साख भी उसी के साथ जुड़ी है?

फिलहाल पुलिस पूरे मामले में कार्रवाई की बात कह रही है, लेकिन ग्रामीणों के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। क्योंकि मामला सिर्फ दो पुलिसकर्मियों की पिटाई का नहीं, बल्कि पुलिस के नाम पर कथित वसूली और आम लोगों के भरोसे का भी है।