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02-Jan-2026 11:55 AM
By First Bihar
medical negligence : मोतिहारी जिले से एक हैरान कर देने वाला और बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि पूरे इलाके में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है। आरोप है कि डेढ़ साल पहले किए गए ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की गंभीर लापरवाही के चलते महिला के पेट में कैंची छोड़ दी गई, जिसकी वजह से अंततः उसकी जान चली गई।
मृतका की पहचान जितना थाना क्षेत्र के मणिभूषण कुमार की 25 वर्षीय पत्नी उषा देवी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले उषा देवी गर्भवती थीं। प्रसव के लिए उन्हें मोतिहारी शहर स्थित डॉक्टर संगीता कुमारी के क्लिनिक में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टर ने सामान्य प्रसव के बजाय ऑपरेशन से डिलीवरी कराने की सलाह दी। परिजनों ने डॉक्टर की बात पर भरोसा करते हुए ऑपरेशन के लिए सहमति दे दी।
ऑपरेशन के बाद उषा देवी ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उषा देवी को पेट में लगातार दर्द रहने लगा। परिजनों ने कई बार डॉक्टर को दिखाया और अल्ट्रासाउंड जांच भी कराई गई, लेकिन रिपोर्ट में कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई। डॉक्टरों द्वारा दर्द निवारक दवाइयाँ दी जाती रहीं, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिल जाती थी। इसी तरह दर्द सहते हुए डेढ़ साल बीत गया, लेकिन उषा देवी की तकलीफ पूरी तरह खत्म नहीं हुई।
बीते दिन अचानक उषा देवी के पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया। हालत इतनी गंभीर हो गई कि परिजन उन्हें तत्काल डॉक्टर कमलेश कुमार के पास लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर ने एमआरआई जांच कराने की सलाह दी। एमआरआई रिपोर्ट सामने आते ही सभी हैरान रह गए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उषा देवी के पेट के अंदर एक कैंची मौजूद है। डॉक्टर ने इसे बेहद गंभीर स्थिति बताते हुए तुरंत ऑपरेशन कराने की सलाह दी और कहा कि यदि देर हुई तो मरीज की जान भी जा सकती है।
इसके बाद परिजन उषा देवी को रहमानिया मेडिकल सेंटर लेकर पहुंचे, जहां ऑपरेशन की तैयारी की गई। परिजनों का आरोप है कि जैसे ही ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट से कैंची निकाली गई, उसी दौरान उसकी हालत बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। महिला की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मृतका के देवर त्रिलोकीनाथ ने इस पूरे मामले को डॉक्टर की घोर लापरवाही बताया है। उन्होंने कहा कि अगर ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने सावधानी बरती होती और कैंची पेट के अंदर नहीं छोड़ी होती, तो आज उनकी भाभी जिंदा होती। उन्होंने यह भी कहा कि डेढ़ साल तक उषा देवी असहनीय दर्द सहती रही और बार-बार डॉक्टरों के चक्कर लगाती रही, लेकिन किसी ने सही जांच नहीं की। आज एक मासूम डेढ़ साल की बच्ची के सिर से माँ का साया उठ गया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले की जांच में जुट गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर चिकित्सा व्यवस्था और निजी क्लिनिकों में हो रही लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। परिजन दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और किसी और परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।