BIHAR NEWS : बिलौटी गांव में हुई चर्चित घटना को लेकर पुलिस प्रशासन ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पूर्वी चंपारण, मोतिहारी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि निलंबित सिपाही आशीष कुमार तिवारी द्वारा मृतक भरत तिवारी का भाई होने की जो बात कही जा रही थी, वह पूरी तरह भ्रामक है। स्थानीय चौकीदार से कराए गए सत्यापन में दोनों के बीच किसी प्रकार का पारिवारिक संबंध नहीं पाया गया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार ग्राम बिलौटी, थाना शाहपुर, जिला भोजपुर में हुई घटना के बाद सिपाही संख्या 647 आशीष कुमार तिवारी ने स्वयं को मृतक भरत तिवारी का भाई बताया था। इस दावे के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच कराई और स्थानीय चौकीदार से सत्यापन कराया गया।
जांच में सामने आया कि आशीष कुमार तिवारी, पिता मथो तिवारी, निवासी बिलौटी थाना शाहपुर जिला भोजपुर तथा मृतक भरत तिवारी, पिता काशीनाथ तिवारी, निवासी बिलौटी थाना शाहपुर जिला भोजपुर दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं, लेकिन दोनों के बीच चचेरे भाई का भी कोई संबंध नहीं है। पुलिस ने इसे भ्रामक सूचना करार दिया है।
पुलिस विभाग की ओर से जारी जानकारी में यह भी बताया गया है कि निलंबित सिपाही आशीष कुमार तिवारी का विभागीय रिकॉर्ड भी विवादों से जुड़ा रहा है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, पिपराकोठी थाना में पदस्थापना के दौरान उन पर एक ओडी पदाधिकारी पर पिस्टल से फायरिंग करने का आरोप लगा था। इस मामले में पिपराकोठी थाना कांड संख्या 173/24 दर्ज किया गया था। विभागीय कार्रवाई करते हुए दो वर्षों की वेतन वृद्धि भी रोक दी गई थी। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया गया है।
इसके अलावा, हरसिद्धि थाना में रिजर्व गार्ड की प्रतिनियुक्ति के दौरान गृह रक्षक सुरेश राम को चाकू मारकर घायल करने के आरोप में भी विभागीय कार्रवाई की गई थी। इस मामले में एक वार्षिक वेतन वृद्धि छह महीने के लिए रोकने की कार्रवाई की गई थी। प्रेस विज्ञप्ति में स्थानीय चौकीदार का लिखित बयान भी संलग्न किया गया है। चौकीदार ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है कि आशीष कुमार तिवारी और मृतक भरत तिवारी के बीच कोई पारिवारिक रिश्ता नहीं है। दोनों केवल एक ही गांव के निवासी हैं।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि घटना से जुड़े तथ्यों को लेकर गलत जानकारी फैलाने की कोशिश की गई, जिसे सत्यापन के बाद सार्वजनिक किया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि अफवाहों और भ्रामक दावों से जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए वास्तविक तथ्यों को सामने लाना जरूरी था।इस खुलासे के बाद बिलौटी गांव में हुई घटना को लेकर एक नया मोड़ आ गया है। अब यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर मृतक का भाई होने का दावा क्यों किया गया और इसके पीछे क्या कारण था। पुलिस प्रशासन फिलहाल पूरे मामले की जांच और संबंधित तथ्यों की पड़ताल में जुटा हुआ है।