Bihar Education News: शिक्षा विभाग में प्रतिनियुक्ति का बड़ा खेल चल रहा है. विभाग के अधिकारी सचिवालय में सेटिंग कर मनचाही जगह पर प्रतिनियुक्ति करा लेते हैं. यह खेल लंबे समय से चल रहा है. प्रतिनियुक्ति के बाद अधिकारी दोनों हाथ से माल बटोर रहे. सारण में प्रतिनियुक्त एक प्रोग्राम पदाधिकारी की अवैध कमाई का खुलासा हुआ, तो सबकी नजरें इस ओर गई हैं. 

अकूत कमाई का खुलासा होने पर प्रतिनियुक्ति रद्द किया गया 

जो डीपीओ सारण में कार्यरत्त थे,दरअसल उसकी पोस्टिंग सहरसा में थी. सारण में लंबे समय से प्रतिनियुक्त थे. उक्त डीपीओ ने 32 महीने में वेतन से 37.43 लाख कमाया, जबकि बैंक अकाउंट से 2.5 करोड़ का लेन-देन हुआ. खुलासा के बाद शिक्षा विभाग ने सारण में प्रतिनियुक्त कार्यक्रम पदाधिकारी अजीत अमर हरिजन का डेपूटेशन रद्द कर दिया है. अजीत अमर कार्यक्रम पदाधिकारी को अपने मूल पदस्थापन जिला शिक्षा पदाधिकारी का कार्यालय सहरसा में तुरंत योगदान देने का आदेश दिया गया है.  

मोतिहारी डीपीओ भी लंबे समय से हैं प्रतिनियुक्ति पर 

वैसे प्रतिनियुक्ति का यह खेल सिर्फ सारण में ही नहीं, बल्कि मोतिहारी में भी सामने आया है. शिक्षा विभाग के एक डीपीओ लंबे समय से पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में प्रतिनियुक्त हैं. 2022 में मोतिहारी से स्थानांतरण होने के बाद उक्त डीपीओ ने फिर से इसी जिले में प्रतिनियुक्ति करा ली. जिस पोस्ट को छोड़कर गए थे, फिर से उसी जगह को धारण कर लिया. लगभग तीन सालों से प्रतिनियुक्ति में ही मोतिहारी की शोभा बढ़ा रहे. 

2022 में तबादला के बाद प्रह्लाद गुप्ता ने करा ली प्रतिनियुक्ति 

हम बात कर रहे हैं, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा) प्रह्लाद कुमार गुप्ता की. शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) के हस्ताक्षर से 30 जून 2022 को स्थानांतरण संबंधी अधिसूचना जारी की गई. जिसमें पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के जिला कार्यक्रम प्राधिकारी प्रहलाद कुमार गुप्ता को अगले आदेश तक अपने ही वेतनमान में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद में पदस्थापित किया गया। यानि इन्हें मोतिहारी से स्थानांतरित कर शिक्षा परियोजना परिषद में भेज दिया गया. स्थानांतरण के बाद प्रह्लाद कुमार गुप्ता ने पटना में ज्वाइन तो किया, पर कुछ समय के बाद फिर से उसी जगह पर आ गए, जिसे छोड़कर पटना गए थे. यानि प्रतिनियुक्ति मोतिहारी में करा लिया. प्रतिनियुक्ति के बाद प्रह्लाद गुप्ता को फिर से मोतिहारी में (सर्व शिक्षा) का डीपीओ बना दिया गया. तब से आज तक ये डीपीओ के पद पर कार्यरत्त हैं. सरकार ने भले ही उक्त डीपीओ को 2022 में ही स्थानांतरित कर दिया, कागज पर ये बिहार शिक्षा परियोजना परिषद में पदस्थापित हैं, पर कार्यरत्त मोतिहारी में हैं. 

सर्विस कंफर्म हुआ 2023 में.... 

मोतिहारी में प्रतिनियुक्त डीपीओ प्रह्लाद कुमार गुप्ता की सेवा को शिक्षा विभाग ने 8 दिसंबर 2023 के प्रभाव से संपुष्ट किया है. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डाइट के तत्कालीन प्राचार्य एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारी पूर्वी चंपारण प्रहलाद कुमार गुप्ता के खिलाफ 10 जून 2022 के प्रभाव से विभागीय कार्यवाही भी संचालित की गई थी. इसके बाद इन्हें भविष्य के लिए चेतावनी का दंड देकर छोड़ा गया था. इस संबंध में 29 अप्रैल 2024 को आदेश जारी हुआ था. 

मोतिहारी के अधिक लगाव के पीछे की क्या है वजह....

जिला शिक्षा कार्यालय मोतिहारी के जानकार बताते हैं कि डीपीओ प्रहलाद कुमार गुप्ता का मोतिहारी से अधिक लगाव है. सेवाकाल के 7-8 वर्षों में अधिकांश समय पोस्टिंग-डेपूटेशन मिलाकर मोतिहारी में ही बिताया है. वैसे डीपीओ का मोतिहारी से अधिक लगाव क्यों हैं, इस बारे में विस्तृत जानकारी अगली खबर में बतायेंगे. 

सारण में प्रतिनियुक्त डीपीओ ने अर्जित की अकूत संपत्ति 

शिक्षा विभाग के निदेशक (प्रशासन) मनोरंजन कुमार ने 29 जून को पत्र जारी किया है. शिक्षा विभाग के आदेश में कहा गया है कि अजीत अमर हरिजन कार्यक्रम पदाधिकारी सहरसा वर्तमान प्रतिनियुक्ति (सारण) का डेपुटेशन समाप्त किया जाता है. अब अजीत अमर कार्यक्रम पदाधिकारी के रूप में अपने मूल पदस्थापन जिला शिक्षा पदाधिकारी का कार्यालय सहरसा में तुरंत योगदान देना सुनिश्चित करें.

बता दें, सारण के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा, योजना एवं लेखा) अजीत अमर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों को लेकर जांच के दायरे में हैं। उप विकास आयुक्त सारण के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी. रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने आवश्यक कार्रवाई के लिए इसे शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन को भेजा था. जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 32 माह की अवधि में डीपीओ को वेतन के रूप में लगभग 27.43 लाख रुपये प्राप्त हुए, जबकि इसी दौरान उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों में 2.51 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन दर्ज किया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि उनकी पत्नी के नाम पर एकमा प्रखंड में लगभग 120 कट्ठा भूमि करीब 41.50 लाख रुपये में खरीदी गई। इसके अतिरिक्त लाखों रुपये की लागत से मकान निर्माण कराए जाने की भी जानकारी मिली है। मामले की शुरुआत एक संवेदक द्वारा जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग में दर्ज कराई गई शिकायत से हुई थी। शिकायत में कार्य दिलाने के नाम पर राशि मांगने का आरोप लगाया गया था।