PURNIA: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने लगी है। लेकिन इस बार चक्रवाती तूफान अर्णव और खराब मौसम ने कुम्हारों की परेशानी बढ़ा दी है। बारिश और मौसम की अनिश्चितता के कारण मिट्टी के दीये और दूसरे बर्तन बनाने का काम प्रभावित हुआ है। पिछले साल के मुकाबले इस बार उत्पादन भी कम हुआ है।


पूर्णिया जिले के बनमनखी अनुमंडल स्थित धीमा गांव में जोगिंदर पंडित का परिवार पिछले करीब 40 वर्षों से मिट्टी के दीये बनाने का काम कर रहा है। दिवाली का मौसम इस परिवार के लिए कमाई का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। लेकिन इस बार खराब मौसम ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।


दरअसल, मिट्टी के दीये तैयार करने के लिए मिट्टी को अच्छी तरह सुखाना और फिर उन्हें पकाना जरूरी होता है। लगातार बारिश के कारण दोनों ही प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं, जिससे उत्पादन में कमी आई है। हालांकि, अब मौसम में सुधार होने के बाद कुम्हार परिवारों ने काम तेज कर दिया है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर दिन-रात दीये तैयार करने में जुटे हैं, ताकि दिवाली से पहले बाजार की मांग पूरी की जा सके।


कुम्हार परिवार की सुनीता देवी का कहना है कि खराब मौसम के अलावा चीनी लाइटों के बढ़ते इस्तेमाल ने भी उनके पारंपरिक कारोबार को प्रभावित किया है। मिट्टी के दीये बनाने में काफी मेहनत लगती है, लेकिन बाजार में बिजली से चलने वाली सजावटी लाइटों के कारण उन्हें कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।


इसके बावजूद कुम्हार परिवारों को उम्मीद है कि दिवाली पर मिट्टी के दीयों की परंपरा बरकरार रहेगी। उन्हें भरोसा है कि लोग स्थानीय कारीगरों से दीये खरीदेंगे और उनके पुश्तैनी कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।


सबसे बड़ी बात यह है कि दिवाली की रौनक के बीच मौसम की मार से जूझ रहे उन कुम्हार परिवारों की मेहनत सामने आती है, जिनके लिए यह त्योहार सालभर की कमाई का सहारा है।

पूर्णिया से बिट्टू कुमार की रिपोर्ट