PATNA: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में आरोपी ठेकेदार रिशु श्री उर्फ रंजन सिन्हा की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद पटना की निगरानी विशेष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वहीं, इस मामले के एक अन्य आरोपी आईएएस अधिकारी संजीव हंस की अग्रिम जमानत याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होगी।
विशेष निगरानी इकाई (SVU) द्वारा दर्ज इस मामले में रिशु श्री पिछले 41 दिनों से पटना के बेऊर जेल में न्यायिक हिरासत में बंद हैं। उन्हें 27 मई को एसवीयू ने गिरफ्तार किया था। निगरानी के विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह की अदालत में बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया।
सुनवाई के दौरान निगरानी की ओर से अधिवक्ता आनंदी सिंह ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि रिशु श्री पर अधिकारियों को कथित तौर पर कमीशन देकर टेंडर हासिल करने और बिल पास कराने का गंभीर आरोप है। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता डॉ. अभिषेक कुमार ने अदालत से जमानत देने की मांग करते हुए कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और एसवीयू अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
उन्होंने दलील दी कि आरोपी जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग कर चुका है और उससे पांच दिन की रिमांड पर पूछताछ भी की जा चुकी है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि मामला मुख्य रूप से दस्तावेजी साक्ष्यों पर आधारित है तथा ईडी की जांच के आधार पर दर्ज एफआईआर के साक्ष्यों को लेकर भी कानूनी आपत्तियां हैं।
गौरतलब है कि विशेष निगरानी इकाई ने हाल ही में इस मामले में करीब 4000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें रिशु श्री को मुख्य आरोपी बनाया गया है। चार्जशीट में आईएएस अधिकारी संजीव हंस, बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, पूर्व इंजीनियर तारिणी दास, इंजीनियर उमेश कुमार सिंह समेत कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। फिलहाल आईएएस संजीव हंस फरार बताए जा रहे हैं। उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर गुरुवार को सुनवाई होगी।
इस मामले में एसवीयू पहले ही बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मुमुक्षु चौधरी, भवन निर्माण विभाग के पूर्व इंजीनियर तारिणी दास और नगर विकास विभाग के इंजीनियर उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच के दौरान इनके ठिकानों से करोड़ों रुपये की संपत्ति और भारी मात्रा में नकदी बरामद होने का दावा किया गया है।