Bihar Police: पटना के अथमलगोला थाने के दारोगा अंजनी सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। फर्स्ट बिहार पर खबर प्रसारित किये जाने के बाद यह कार्रवाई ग्रामीण एसपी की गयी है।


 दरअसल सोशल मीडिया पर दारोगा अंजनी सिंह का वीडियो तेजी से वायल हो रहा था। जिसमें वो लुंगी पहनकर थाने में ड्यूटी बजा रहे थे और फरियादियों से आवेदन ले रहे थे। वीडियो सामने आने के बाद ना सिर्फ एक पुलिसकर्मी पर नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगा। इसे गंभीरता से लेते हुए पटना ग्रामीण एसपी ने अथमलगोला थाने के दारोगा अंजनी सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) कार्यालय ने इस संबंध में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि 14.07.2026 की रात्रि में व्हाट्सएप पर प्राप्त एक वायरल वीडियो जिसमें अथमलगोला थाना के एक पुलिस पदाधिकारी जो अर्द्धनग्न अवस्था में (कमर के उपर बगैर कपड़े का) ओ०डी० डेस्क में खड़ा है, जिसका सत्यापन अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी, बाढ-2 से कराया गया। 


अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी, बाढ-2 द्वारा उक्त वायरल वीडियों का सत्यापनोंपरांत जॉच प्रतिवेदन समर्पित किया गया, जिसमें उल्लेख किया गया है कि अथमलगोला थाना के सी०सी०टी०वी० फुटेज का अवलोकन किया गया। जाँच के क्रम में पाया गया कि दिनांक-14.07.2026 को प्रातः 10:00 बजे अथमलगोला थाना कांड संख्या-229/26 की वादिनी कांड के संबंध में थाना पर उपस्थित थे। प्रातः 10:11 बजे पर स०अ०नि० अंजनी कुमार थाना परिसर के अंदर से निर्धारित पुलिस वर्दी धारण किये बिना ओ०डी० डेस्क पर आये। एक अन्य आवेदक से कुछ कागज प्राप्त कर प्रातः 10:13 बजे पुनः वापस चले गये। वायरल वीडियो का समय एवं घटनास्थल सी०सी०टी०वी० फुटेज से पुष्टि हुई है। 


ओ०डी० डेस्क थाना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सम्पर्क बिन्दु है, जहाँ आम नागरिक पुलिस प्रशासन से प्रत्यक्ष रूप से सम्पर्क करते है। ऐसे स्थान पर किसी भी परिस्थिति में पुलिस पदाधिकारी द्वारा निर्धारित वर्दी धारण किये बिना, केवल लूंगी के एवं बिना उपरी परिधान (खुला बदन) के थाना ओ०डी० डेस्क पर उपस्थित होकर आम नागरिकों से सम्पर्क स्थापित करना पुलिस के अनुशासन, मर्यादा एवं पेशेवर आचरण के स्थापित मानकों के प्रतिकूल है। इस प्रकार का आचरण न केवल पुलिस विभाग की गरिमा एवं छवि को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है, बल्कि आमजन के बीच पुलिस के प्रति विश्वास एवं सम्मान पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। अतः अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी, बाढ-2 द्वारा जाँचों उपरांत वायरल वीडियों की पुष्टि करते हुए अनुशासनिक कार्रवाई हेतु किये गये अनुशंसा एवं स०अ०नि० अंजनी कुमार द्वारा बरती गई अनुशासनहीनता, मनमानेपन, संदिग्ध आचरण एवं पुलिस की छवि धुमिल करने के आरोप में इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए अनुशासनिक जॉच प्रारंभ करने का आदेश दिया गया है।


बता दें कि राजधानी पटना से सटे अथमलगोला थाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि एक व्यक्ति सिर्फ लुंगी पहने हुए है। उसके शरीर के ऊपरी हिस्से पर न टी-शर्ट है, न शर्ट और न ही कोई अन्य कपड़ा। इसी हालत में वह थाने के भीतर एक फरियादी से आवेदन लेता नजर आ रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह व्यक्ति बिहार पुलिस में तैनात एएसआई अंजनी सिंह बताया जा रहा है, जिनकी ड्यूटी वर्तमान में अथमलगोला थाना में है। वीडियो वायरल होने के बाद सवाल उठने लगा कि क्या थाने का अनुशासन भी अब "घर जैसा माहौल" बन गया है? अगर जनता अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचे और वहां ड्यूटी पर मौजूद पुलिस अधिकारी वर्दी की जगह सिर्फ लुंगी में मिले, तो पुलिस की पेशेवर छवि पर क्या असर पड़ेगा?


इस वायरल वीडियो को लेकर जब अथमलगोला थाना से बातचीत की गई तो पहले कहा गया कि उन्हें वीडियो की विशेष जानकारी नहीं है। लेकिन बाद में थाना की ओर से यह भी कहा गया कि "अगर वीडियो वायरल हुआ है तो उसमें गलत क्या है?" इसके बाद जब रिपोर्टर ने पूछा कि ड्यूटी के दौरान एक पुलिसकर्मी का इस तरह बिना ऊपरी कपड़ों के थाने में मौजूद रहना क्या उचित है, तो सफाई दी गई कि थाना परिसर में आवासीय व्यवस्था भी है, इसलिए अगर कोई इस अवस्था में बाहर आ जाए तो इसमें क्या गलत है।


यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। थाना परिसर में सरकारी आवास होना अलग बात है, लेकिन जब कोई पुलिस अधिकारी फरियादी से आवेदन ले रहा हो, तब वह निजी जीवन नहीं बल्कि सरकारी ड्यूटी निभा रहा होता है। ऐसे समय न्यूनतम ड्रेस कोड, शालीनता और अनुशासन का पालन अपेक्षित होता है। क्या कोई सरकारी कार्यालय का कर्मचारी सिर्फ लुंगी पहनकर, बिना शर्ट या टी-शर्ट के आम लोगों का काम करेगा? अगर जवाब "नहीं" है, तो फिर पुलिस थाने में ऐसा कैसे स्वीकार्य हो सकता है? इस पूरे मामले में ग्रामीण एसपी ने इसे गंभीर माना है। उन्होंने निलंबन की कार्रवाई कर दी। 


राजद ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार और पुलिस व्यवस्था पर हमला बोला। पोस्ट में बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए गए और सरकार की जवाबदेही पर भी निशाना साधा गया। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर संबंधित पक्ष की अपनी प्रतिक्रिया हो सकती है। राजद ने लिखा है कि= "अथमलगोला थाना में अंजनी कुमार सिंह महिला फरियादी के सामने! Bihar Police नीतीश कुमार के समय भी कोई व्यवस्थित, तत्पर या ईमानदार पुलिस बल नहीं थी, पर सम्राट चौधरी के गृहमंत्री बनते ही बिहार पुलिस के कर्मी बिल्कुल आपे से बाहर हो चुके हैं! पूरी तरह से निरंकुश, भ्रष्ट, असभ्य, अभद्र, बेईमान..हो चुकी है पुलिस बल! जब गृहमंत्री सह मुख्यमंत्री ऐसा नमूना हो, तो नीचे के अधिकारी, कर्मी कैसे होंगे? "


लेकिन राजनीति से अलग हटकर देखें तो वायरल वीडियो ने एक गंभीर बहस छेड़ दी थी। सवाल यह नहीं है कि पुलिसकर्मी थाना परिसर के सरकारी आवास में किस वेशभूषा में रहता है। सवाल यह है कि क्या उसी अवस्था में फरियादियों से मिलना और सरकारी काम करना पुलिस की गरिमा के अनुरूप है? बिहार पुलिस लगातार कानून-व्यवस्था सुधारने और जनता का भरोसा जीतने की बात करती है। लेकिन भरोसा सिर्फ अपराधियों की गिरफ्तारी से नहीं बनता, बल्कि पुलिस के व्यवहार, अनुशासन और पेशेवर आचरण से भी बनता है। एक वायरल वीडियो पूरे विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर देता है।