Bihar Cabinet Meeting:पटना के मुख्य सचिवालय स्थित मंत्रिमंडल कक्ष में हुई सम्राट कैबिनेट की बैठक में 24 महत्वपूर्ण एजेंडों पर मुहर लगी। बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक मामलों से जुड़े अहम फैसले लिए गए। कैबिनेट की बैठक में बिहार के दोनों डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी और विजेन्द्र यादव सहित तमाम मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


 बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने बिहार के 19 न्यायमंडलों में अनन्य विशेष न्यायालयों (Exclusive Special Courts) के लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के 19 नए पद सृजित करने की स्वीकृति प्रदान की है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह निर्णय विधि विभाग, बिहार और पटना उच्च न्यायालय के महानिबंधक की अनुशंसा के आधार पर लिया गया है।


इन 19 न्यायमंडलों में बनेंगे विशेष न्यायालय

जिन जिलों में एक-एक जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश का पद सृजित किया जाएगा, उनमें पश्चिमी चंपारण (बेतिया), मधुबनी, भोजपुर (आरा), सिवान, अररिया, सुपौल, खगड़िया, जहानाबाद, बक्सर, जमुई, कैमूर, कटिहार, सीतामढ़ी, मुंगेर, मधेपुरा, बांका, शेखपुरा, औरंगाबाद और लखीसराय शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत लंबित मामलों का शीघ्र और प्रभावी निपटारा सुनिश्चित करना है।


पटना और मुजफ्फरपुर में भ्रष्टाचार मामलों के लिए नए विशेष न्यायालय

इसके अलावा, बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-3 के तहत पटना और मुजफ्फरपुर में अतिरिक्त विशेष न्यायालयों के गठन को भी मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत पटना में दो और मुजफ्फरपुर में एक अतिरिक्त विशेष न्यायालय स्थापित किया जाएगा। इन न्यायालयों के संचालन के लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश के कुल तीन नए पद सृजित करने की स्वीकृति दी गई है। सरकार का मानना है कि इन नए विशेष न्यायालयों की स्थापना से भ्रष्टाचार और एससी-एसटी अत्याचार से संबंधित मामलों के त्वरित निष्पादन में तेजी आएगी तथा न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और समयबद्ध हो सकेगी।