Vinay Kumar: बिहार के पूर्व DGP विनय कुमार ने भारतीय पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS ले लिया है। राज्य सरकार ने उनका VRS आवेदन स्वीकार करने के साथ ही उन्हें बिहार का मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्त कर दिया है। पुलिस की वर्दी में लंबी सेवा के बाद अब विनय कुमार एक नई भूमिका में नजर आएंगे। छुट्टी से लौटने के बाद वह बिहार सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त के तौर पर जिम्मेदारी संभालेंगे। ऐसे में लोगों की नजर इस बात पर है कि DGP पद छोड़ने के बाद उनके पास किस तरह के अधिकार होंगे और उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी।


विनय कुमार 1991 बैच के बिहार कैडर के IPS अधिकारी रहे हैं। अपने लंबे पुलिस करियर में उन्होंने बिहार के कई जिलों में SP के तौर पर काम किया। इसके बाद DIG और IG जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभालीं। वह बिहार पुलिस के DGP भी रहे। उनका नियमित कार्यकाल दिसंबर 2026 तक था, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने VRS के लिए आवेदन किया, जिसे राज्य सरकार ने मंजूर कर लिया। इसके बाद सरकार ने उन्हें मुख्य सूचना आयुक्त की जिम्मेदारी देने का फैसला किया।


DGP के तौर पर विनय कुमार के पास बिहार पुलिस की पूरी कमान थी। कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और अपराध नियंत्रण से जुड़े मामलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक पुलिस व्यवस्था उनके नेतृत्व में काम करती थी। लेकिन मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में उनकी भूमिका पूरी तरह अलग होगी। अब उनका काम पुलिस प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि सूचना के अधिकार यानी RTI से जुड़े मामलों की सुनवाई और उन पर फैसला करना होगा।


बिहार सूचना आयोग RTI Act के तहत काम करता है। मुख्य सूचना आयुक्त के पास सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों में अपील और शिकायतों की सुनवाई करने का अधिकार होता है। आयोग को कुछ मामलों में सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां भी प्राप्त हैं। किसी मामले की जांच के दौरान आयोग संबंधित व्यक्ति को समन कर सकता है और जरूरी दस्तावेज या रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दे सकता है। गवाहों को बुलाने और उनके बयान दर्ज कराने जैसी शक्तियां भी कानून के तहत आयोग को मिली हैं।


RTI से जुड़े मामलों में आयोग सार्वजनिक प्राधिकरण से सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दे सकता है। यदि किसी मामले में कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है तो आयोग आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दे सकता है। सूचना देने में देरी या कानून के तहत निर्धारित परिस्थितियों में सूचना नहीं देने जैसे मामलों में जुर्माना लगाने का प्रावधान भी RTI कानून में मौजूद है। हालांकि, मुख्य सूचना आयुक्त की शक्तियां RTI कानून के दायरे में ही होती हैं।


अब बात आती है विनय कुमार की सैलरी की। मुख्य सूचना आयुक्त के पद के लिए केंद्रीय नियमों के तहत 2.50 लाख रुपये प्रति माह वेतन का प्रावधान है। हालांकि, VRS के बाद पेंशन प्राप्त करने वाले अधिकारी के मामले में लागू नियमों के अनुसार पेंशन की राशि वेतन में समायोजित की जा सकती है। इसलिए केवल 2.50 लाख रुपये को उनकी अंतिम मासिक प्राप्ति मानना सही नहीं होगा। उनकी वास्तविक राशि संबंधित सेवा और पेंशन नियमों के अनुसार निर्धारित होगी। पद के साथ आवास, यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता जैसी सुविधाओं का भी प्रावधान हो सकता है।


मुख्य सूचना आयुक्त को सरकारी व्यवस्था में सीधे मुख्य सचिव या DGP की तरह प्रशासनिक कमान वाला अधिकारी समझना सही नहीं है। यह RTI Act के तहत गठित वैधानिक आयोग का पद है। इसका अधिकार क्षेत्र सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों तक सीमित रहता है। यानी विनय कुमार अब पुलिस अधिकारियों को कानून-व्यवस्था के मामलों में DGP की तरह आदेश नहीं देंगे, लेकिन किसी RTI मामले में संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण को कानून के मुताबिक कार्रवाई या सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दे सकते हैं।


विनय कुमार की नई जिम्मेदारी ऐसे समय में शुरू हो रही है जब सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और सूचना के अधिकार से जुड़े मामलों की अहमियत लगातार बनी हुई है। DGP के पद पर जहां उनकी जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़ी थी, वहीं अब उनका फोकस RTI मामलों की सुनवाई, नागरिकों के सूचना संबंधी अधिकारों और सरकारी विभागों की जवाबदेही से जुड़े मामलों पर रहेगा। पुलिस की वर्दी छोड़कर सूचना आयोग की कुर्सी तक पहुंचने वाले विनय कुमार के प्रशासनिक अनुभव का इस्तेमाल अब किस तरह होता है, इस पर भी सबकी नजर रहेगी।