Bihar News : बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध शराब कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस और उत्पाद विभाग लगातार छापेमारी कर शराब माफियाओं पर शिकंजा कसने का दावा करते हैं, लेकिन कई बार कार्रवाई के तरीके पर ही सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसा ही एक मामला वैशाली जिले से सामने आया है, जहां उत्पाद विभाग की कार्यशैली चर्चा का विषय बन गई है।
मामला बेलसर थाना क्षेत्र के मौना गांव का है। जानकारी के अनुसार, पुलिस और उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के एक घर में भारी मात्रा में विदेशी शराब छिपाकर रखी गई है। सूचना मिलते ही सबसे पहले उत्पाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और संबंधित घर में छापेमारी की। काफी देर तक तलाशी अभियान चलाया गया, लेकिन उत्पाद विभाग की टीम को वहां से कुछ भी बरामद नहीं हुआ। इसके बाद टीम खाली हाथ वापस लौट गई।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। उत्पाद विभाग की टीम के लौटने के महज दस मिनट बाद बेलसर थाना पुलिस उसी जगह पहुंची और दोबारा छापेमारी शुरू की। पुलिस की तलाशी के दौरान उसी घर से 11 कार्टन विदेशी शराब बरामद कर ली गई। शराब की इतनी बड़ी खेप मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस जगह से पुलिस ने भारी मात्रा में शराब बरामद की, वहां उत्पाद विभाग की टीम को आखिर कुछ क्यों नहीं मिला। स्थानीय लोगों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या उत्पाद विभाग ने ठीक से तलाशी नहीं ली या फिर जानबूझकर कार्रवाई में ढिलाई बरती गई।
हालांकि पुलिस ने शराब बरामद होने की पुष्टि की है, लेकिन इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि छापेमारी की भनक लगते ही कारोबारी मौके से फरार हो गए। पुलिस अब शराब तस्करों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।
घटना के बाद उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आम लोगों का कहना है कि अगर पुलिस दोबारा रेड नहीं करती तो इतनी बड़ी मात्रा में शराब बरामद ही नहीं हो पाती। ऐसे में यह मामला विभागीय लापरवाही का है या फिर कुछ और, इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद सरकार लगातार सख्ती के दावे करती रही है। इसके बावजूद आए दिन शराब बरामद होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई बार उत्पाद विभाग और पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद भी होते रहे हैं। वैशाली की यह घटना एक बार फिर सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रही है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। वहीं, स्थानीय लोग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि यह साफ हो सके कि आखिर उत्पाद विभाग की टीम को उसी जगह शराब क्यों नहीं मिली, जहां कुछ ही देर बाद पुलिस ने 11 कार्टन विदेशी शराब बरामद कर ली।