Bihar Electronics City: बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की तैयारी है। वैशाली जिले के राजापाकर में करीब 1100 एकड़ जमीन पर भव्य इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी विकसित की जाएगी। इसे कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी की तर्ज पर तैयार करने की योजना है। इस परियोजना के जरिए बिहार को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी में देश-विदेश की कई बड़ी कंपनियों ने निवेश को लेकर रुचि दिखाई है। हाल ही में दक्षिण कोरिया की एक कंपनी के प्रतिनिधियों ने भी प्रस्तावित स्थल का दौरा किया। इसके अलावा कई अन्य मल्टीनेशनल कंपनियां भी यहां निवेश करने की इच्छुक हैं। सरकार को इस परियोजना से करीब 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग एक लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।
बिहार में एनडीए सरकार के एक साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार दौरा प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार, 21 नवंबर को प्रधानमंत्री वैशाली जिले के राजापाकर स्थित जाफरपट्टी में जनसभा को संबोधित कर सकते हैं। इस दौरान पीएम मोदी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पार्क और राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम) के निर्माण कार्य का शुभारंभ कर सकते हैं। इन परियोजनाओं से वैशाली सहित पूरे बिहार में औद्योगिक और शैक्षणिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
राजापाकर, जंदाहा और महुआ प्रखंडों में कुल करीब 1243 एकड़ जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इसी औद्योगिक क्षेत्र के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी और निफ्टेम की स्थापना की जाएगी।प्रस्तावित योजना के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी करीब 1100 एकड़ में विकसित होगी। निफ्टेम के लिए लगभग 100 एकड़ जमीन निर्धारित की गई है। औद्योगिक क्षेत्र के लिए अब तक 485 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। शेष 748 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।
वैशाली की इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी को बेंगलुरु मॉडल पर विकसित करने की तैयारी है। इसके लिए बिहार के उद्योग विभाग की टीम बेंगलुरु जाकर वहां की इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी का अध्ययन कर चुकी है। सरकार की कोशिश है कि यहां आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित किया जाए। इसके अलावा विदेशों में काम कर रहे प्रतिभाशाली युवाओं को भी बिहार में उद्योग और कारोबार स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
बेंगलुरु की इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी करीब 800 एकड़ में फैली है, जहां इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस, एचसीएल, टेक महिंद्रा और बायोकॉन जैसी बड़ी कंपनियां मौजूद हैं। इसी मॉडल को ध्यान में रखकर वैशाली में भी बड़े औद्योगिक और तकनीकी संस्थानों को लाने की योजना है। प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी में कंपनियों को जमीन के साथ प्लग एंड प्ले सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसका मतलब है कि कंपनियां तैयार बुनियादी ढांचे में अपनी मशीनें स्थापित कर सीधे उत्पादन शुरू कर सकेंगी।
इस इलेक्ट्रॉनिक्स हब में मुख्य रूप से मोबाइल फोन और स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर चिप और कंप्यूटर पार्ट्स, एलईडी बल्ब और इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज, स्मार्ट टीवी और डिजिटल कैमरा, मेडिकल और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्ट वॉच और अन्य डिजिटल उपकरण समेत अन्य उत्पादों के निर्माण से जुड़ी कंपनियों को जगह दी जाएगी।
वैशाली में इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी बनने से बिहार को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। करीब 30 हजार करोड़ रुपये के संभावित निवेश और एक लाख रोजगार के अवसरों का लक्ष्य इस परियोजना को राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाता है।