पटना: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयन होना लाखों युवाओं का सपना होता है। अधिकांश अभ्यर्थी यह भी चाहते हैं कि उन्हें अपने गृह राज्य का कैडर मिले, ताकि वे अपने ही प्रदेश में प्रशासनिक सेवाएं दे सकें। लेकिन बिहार के सामान्य (General), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थियों के लिए 2025 बैच में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। नई कैडर आवंटन व्यवस्था के तहत इन तीनों श्रेणियों के लिए बिहार कैडर में इनसाइडर (Home Cadre) वैकेंसी शून्य कर दी गई है।


कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की ओर से बिहार सरकार को भेजे गए 2025 बैच के कैडर आवंटन पैटर्न के अनुसार General, OBC और EWS श्रेणी में बिहार के लिए कोई इनसाइडर सीट नहीं रखी गई है। इसका सीधा असर उन बिहारी अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जो 2025 की UPSC परीक्षा में चयनित होंगे और वर्ष 2027 में फील्ड पोस्टिंग के लिए जाएंगे।


क्या होगा इसका असर?

इस फैसले का सबसे बड़ा असर यह होगा कि यदि बिहार का कोई General, OBC या EWS श्रेणी का अभ्यर्थी UPSC में ऑल इंडिया टॉप रैंक भी हासिल कर ले, तब भी उसे बिहार कैडर मिलने की संभावना नहीं रहेगी। कैडर आवंटन के मौजूदा नियमों के अनुसार जिस श्रेणी में इनसाइडर सीट उपलब्ध नहीं होती, उस श्रेणी के चयनित अभ्यर्थी को उसकी वरीयता सूची के अनुसार किसी दूसरे राज्य का कैडर आवंटित किया जाता है। यानी बिहार के प्रतिभाशाली उम्मीदवारों को अपने गृह राज्य की बजाय दूसरे राज्यों में प्रशासनिक जिम्मेदारी निभानी होगी।


बिहार में कौन आएंगे?

2025 बैच के लिए बिहार कैडर में General श्रेणी के दो और OBC श्रेणी के तीन IAS अधिकारियों की नियुक्ति होगी, लेकिन ये सभी दूसरे राज्यों के निवासी होंगे। यानी वे बिहार में सेवा देंगे, लेकिन उनका गृह राज्य बिहार नहीं होगा।हालांकि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में बिहार के लिए एक-एक इनसाइडर सीट रखी गई है। इन श्रेणियों के बिहार निवासी अभ्यर्थियों को गृह राज्य का कैडर मिलने का अवसर बना रहेगा।


इनसाइडर वैकेंसी क्यों महत्वपूर्ण होती है?

IAS कैडर आवंटन में दो प्रकार की सीटें होती हैं—इनसाइडर (Home Cadre) और आउटसाइडर (Other State Cadre)। इनसाइडर सीट का मतलब होता है कि चयनित अधिकारी को उसके अपने राज्य में सेवा करने का मौका मिलेगा।यदि किसी श्रेणी में इनसाइडर सीट नहीं होती, तो उस श्रेणी के अभ्यर्थियों को दूसरे राज्यों का कैडर आवंटित किया जाता है। यही वजह है कि इस बार General, OBC और EWS वर्ग के बिहार के अभ्यर्थियों के लिए गृह राज्य में सेवा का रास्ता लगभग बंद हो गया है।


तीन प्रमुख वजहें

इस बदलाव के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं—


पहले क्या हुआ था?

मार्च 2026 में 2024 बैच के कुल 10 IAS अधिकारियों को बिहार कैडर आवंटित किया गया था। इनमें General श्रेणी के सात अधिकारी थे, लेकिन केवल दो अधिकारियों को ही बिहार होम कैडर मिला। बाकी पांच अधिकारी दूसरे राज्यों के निवासी थे।वहीं OBC श्रेणी में दो अधिकारियों को बिहार कैडर मिला था, जिनमें एक बिहार का निवासी था और दूसरा दूसरे राज्य से था। इससे पहले भी बिहार में इनसाइडर सीटों की संख्या लगातार घटती रही है।


स्थानीय प्रशासन पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले वर्षों में भी इनसाइडर वैकेंसी कम होती रही तो बिहार की नौकरशाही का स्थानीय समाज, भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय समस्याओं से जुड़ाव पहले की तुलना में कमजोर हो सकता है। हालांकि दूसरी ओर यह भी तर्क दिया जाता है कि ऑल इंडिया सर्विस का उद्देश्य ही राज्यों के बीच प्रशासनिक अनुभव और निष्पक्षता को बढ़ावा देना है, इसलिए अलग-अलग राज्यों के अधिकारियों की नियुक्ति इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


युवाओं के बीच बढ़ी चर्चा

UPSC की तैयारी कर रहे बिहार के हजारों अभ्यर्थियों के बीच इस नए कैडर पैटर्न को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई उम्मीदवारों का कहना है कि गृह राज्य में सेवा देने का अवसर न मिलना उनके लिए निराशाजनक हो सकता है, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि IAS अधिकारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण सेवा का अवसर है, चाहे वह किसी भी राज्य में मिले।

फिलहाल 2025 बैच के कैडर पैटर्न ने इतना स्पष्ट कर दिया है कि General, OBC और EWS श्रेणी के बिहार के अभ्यर्थियों के लिए 2027 में बिहार कैडर पाने की राह लगभग बंद रहेगी, जबकि SC और ST श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए होम कैडर का अवसर अभी भी उपलब्ध रहेगा। यह बदलाव आने वाले वर्षों में बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था और UPSC अभ्यर्थियों की रणनीति—दोनों पर असर डाल सकता है।