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10-Jan-2026 08:36 PM
By First Bihar
DELHI: नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए बजट-पूर्व परामर्श बैठक में बिहार के माननीय वित्त मंत्री श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने राज्य के हितों को मजबूती से रखा। बैठक में वित्त विभाग, बिहार के अपर मुख्य सचिव श्री आनंद किशोर सहित विभिन्न राज्यों के माननीय मुख्यमंत्री और माननीय वित्त मंत्री भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान बिहार की ओर से निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट किया गया:
1. राजकोषीय असंतुलन: उप-कर एवं अधिभार को विभाज्य कोष में लाने की मांग
माननीय वित्त मंत्री ने कहा कि कुल कर राजस्व में उप-करों (Cess) और अधिभारों (Surcharge) की हिस्सेदारी वर्ष 2011-12 के 10.4% से बढ़कर अब 13.6% हो गई है। चूँकि ये केंद्र के विभाज्य कोष का हिस्सा नहीं होते, इसलिए बिहार जैसे राज्यों को उनके संवैधानिक हिस्से का नुकसान हो रहा है। उन्होंने पुरजोर मांग की कि इन्हें विभाज्य कोष के दायरे में लाया जाए।
2. अतिरिक्त ऋण ग्रहण सीमा (Borrowing Limit) की अनुमति
बिहार की प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने के लिए राज्य ने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 2.0% की अतिरिक्त उधार सीमा की मांग की है। यह सुविधा वार्षिक 3% की मौजूदा सीमा के अतिरिक्त मांगी गई है, ताकि राज्य अपनी भौगोलिक और ऐतिहासिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए ढांचागत निवेश बढ़ा सके।
3. बाढ़ आपदा से बचाव हेतु 'विशेष पैकेज' और नदी जोड़ो परियोजना
उत्तरी बिहार में कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियों से होने वाली भीषण तबाही को रोकने के लिए माननीय मंत्री ने 'रिलीफ एवं डिजास्टर रिजिलिएंट पैकेज' का अनुरोध किया। इसमें सैटेलाइट पूर्वानुमान, GIS मैपिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया गया है। साथ ही, बाढ़ और सूखे के स्थायी समाधान हेतु 'इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर' (नदी जोड़ो परियोजना) को प्राथमिकता देने की अपील की गई।
4. कृषि में आधुनिक तकनीक और औद्योगिक विकास
राज्य में रोजगार सृजन हेतु कृषि क्षेत्र में AI, ड्रोन और ब्लॉकचेन जैसी नई तकनीकों पर आधारित केंद्र प्रायोजित योजनाओं की आवश्यकता जताई गई। इसके अतिरिक्त, बिहार में प्रचुर जल संसाधन और कुशल श्रम की उपलब्धता को देखते हुए राज्य में नए उद्योगों की स्थापना के लिए विशेष सहयोग की मांग की गई, ताकि संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित हो सके। वित्त मंत्री ने बिहार के विकास से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन केंद्रीय वित्त मंत्री को सौंपा और विश्वास जताया कि आगामी बजट में बिहार की इन न्यायसंगत मांगों पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।