पटना: समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस दावे के बाद कि NDA शासित सभी 21 राज्यों में वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले UCC लागू कर दिया जाएगा, बिहार में जनता दल यूनाइटेड ने अपना रुख साफ कर दिया है। JDU के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने दो टूक कहा है कि बिहार में UCC लागू नहीं होगा।

श्याम रजक ने अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने संसद में UCC से जुड़े कानून का समर्थन जरूर किया था, लेकिन उसी समय यह भी स्पष्ट कर दिया गया था कि इसे बिहार में लागू नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार को लेकर JDU का रुख पहले भी साफ था और अभी भी वही है।

अमित शाह ने क्या कहा था?

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार, 13 सितंबर को UCC को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी और NDA की सरकार वाले सभी 21 राज्यों में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता लागू कर दी जाएगी। अमित शाह के मुताबिक, देश के कुछ राज्यों में UCC लागू किया जा चुका है और बाकी NDA शासित राज्यों में भी इसे लागू करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जाएगा।

UCC का उद्देश्य अलग-अलग धर्मों के लिए लागू अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में समान नागरिक नियम लागू करना है। हालांकि, इसे लागू करने का तरीका और इसके प्रावधान राज्यों के स्तर पर अलग हो सकते हैं।अमित शाह के इस बयान के बाद बिहार में सवाल उठने लगा कि क्या NDA शासित बिहार में भी UCC लागू किया जाएगा? इसी सवाल पर श्याम रजक ने JDU का रुख सामने रख दिया।

'संसद में समर्थन किया, बिहार में लागू नहीं करेंगे'

श्याम रजक ने कहा कि संसद में कानून का समर्थन करना और किसी राज्य में उसे लागू करना दो अलग-अलग बातें हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि JDU ने संसद में इसका समर्थन किया था, लेकिन बिहार में इसे लागू करने को लेकर पार्टी की स्थिति पहले से स्पष्ट रही है।श्याम रजक के इस बयान ने बिहार में NDA के भीतर UCC को लेकर चर्चा को फिर हवा दे दी है। खासकर ऐसे समय में जब केंद्र सरकार की ओर से NDA शासित राज्यों में UCC को आगे बढ़ाने की बात कही गई है। अब बड़ा सवाल यही है कि अगर केंद्र की तरफ से NDA के सभी राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य रखा गया है, तो बिहार में JDU के इस स्पष्ट रुख के बाद आगे की राह क्या होगी?

कांग्रेस-RJD गठबंधन पर भी श्याम रजक का हमला

इसी दौरान बिहार विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के बीच सीट बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद पर भी श्याम रजक ने निशाना साधा। कांग्रेस की ओर से अपने उम्मीदवार उतारने के संकेत और महागठबंधन में संभावित दरार को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि यह गठबंधन पहले भी स्वार्थ का गठबंधन था और आगे भी स्वार्थ का ही गठबंधन रहेगा। श्याम रजक ने कहा कि ऐसे गठबंधन का कोई खास मतलब नहीं है। उनके इस बयान को बिहार की चुनावी राजनीति में कांग्रेस और RJD के बीच चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

18 सितंबर की JDU बैठक पर भी साफ किया रुख

वहीं, 18 सितंबर को JDU के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की प्रस्तावित बड़ी बैठक को लेकर भी श्याम रजक ने स्थिति स्पष्ट की। बैठक को लेकर लगाई जा रही राजनीतिक अटकलों को उन्होंने खारिज करते हुए कहा कि इसका कोई 'हिडन एजेंडा' नहीं है।

उन्होंने बताया कि यह बैठक मूल रूप से एक ट्रेनिंग कार्यक्रम है। इसमें पार्टी के विधायक और विधान परिषद सदस्य यह सीखेंगे कि विधानसभा और विधान परिषद में किस तरीके से सवाल पूछे जाते हैं, सदन के नियम-कायदे क्या हैं और संसदीय प्रक्रियाओं का पालन किस तरह किया जाता है।श्याम रजक ने साफ कहा कि इस बैठक का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।

'नाम बदलने पर कोई चर्चा नहीं होगी'

JDU की बैठक को लेकर जब उनसे पार्टी के नाम में बदलाव की संभावनाओं पर सवाल किया गया तो श्याम रजक ने इसे भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि बैठक में नाम बदलने को लेकर कोई चर्चा नहीं होगी।यानी एक तरफ दिल्ली से UCC को लेकर NDA शासित राज्यों में बड़े लक्ष्य की बात सामने आई है, तो दूसरी तरफ बिहार में JDU ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए साफ संकेत दे दिया है कि UCC को लेकर बिहार की स्थिति अलग रहेगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र के UCC एजेंडे और बिहार में JDU के स्पष्ट रुख के बीच आने वाले दिनों में राजनीतिक तस्वीर किस दिशा में जाती है।