PATNA:टावर इंस्टॉलेशन के नाम पर ठगी से जुड़े आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-08/2017 में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू), बिहार ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
आर्थिक अपराध इकाई के अनुसार, यह मामला 13 मई 2017 को दर्ज किया गया था, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 419, 420, 467, 468, 471, 201 और 120बी के तहत मामला दर्ज है। पटना के माननीय व्यवहार न्यायालय द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के आधार पर कार्रवाई करते हुए ईओयू ने संजय कुमार सिंह उर्फ संटू सिंह (पिता-स्वर्गीय अरविंद सिंह उर्फ केवल सिंह), निवासी तेलमर, ओपी हरनौत, जिला नालंदा को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को 3 अगस्त 2026 को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने North Infratel India Ltd. नामक एक फर्जी कंपनी बनाकर टावर लगाने के नाम पर उत्तर प्रदेश निवासी परिवादी से 49,922 रुपये की ठगी की थी।
आर्थिक अपराध इकाई ने बताया कि परिवादी ने ई-मेल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। जांच के बाद मामला दर्ज किया गया। इस मामले में माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप से ठगी गई राशि पहले ही परिवादी को वापस कराई जा चुकी थी। फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई मामले के अन्य आरोपियों और संबंधित पहलुओं की जांच कर रही है।
आर्थिक अपराध प्रभाग बिहार पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है। जिसमें इस बात का जिक्र है कि आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या-08/2017, दिनांक-13.05.2017, धारा-419/420/467 /468/471/201/120 (बी) भा०द०वि० के द्वारा North Infratel India Ltd. पर Tower Installation के नाम पर ठगी करने से संबंधित कांड है। इस कांड में माननीय व्यवहार न्यायालय, पटना द्वारा प्राप्त अजमानतीय वारंट के आलोक में आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना द्वारा कार्यवाई करते हुए अभियुक्त 01. संजय कुमार सिंह उर्फ संटू सिंह, पिता-स्व० अरविन्द सिंह उर्फ केवल सिंह, सा०-तेलमर ओ०पी०-हरनौत, जिला-नालंदा को गिरफ्तार करते हुए दिनांक-03.08.2026 को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
उल्लेखनीय है कि इस कांड में परिवादी को ठगी की गई रकम माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप से पूर्व में ही वापस कराई गई थी। अभियुक्तों ने North Infratel India Ltd. नामक एक फर्जी कम्पनी बनाकर परिवादी से कुल 49922/- रू0 की ठगी की थी। परिवादी जो उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे द्वारा ई-मेल के माध्यम से शिकायत आर्थिक अपराध इकाई को प्रेषित किये थे। इकाई द्वारा जाँच के उपरान्त यह काण्ड अंकित किया गया था।