PATNA: बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि (कंटिजेंसी फंड) से 3662 करोड़ रुपये निकाले जाने के फैसले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार को घेरा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सवाल किया है कि क्या बिहार की वित्तीय स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि सरकार को नियमित बजटीय प्रावधानों की जगह इमरजेंसी फंड का सहारा लेना पड़ रहा है। 


सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने के लिए इमरजेंसी फंड से पैसा निकालने का हवाला देकर बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से सवाल पूछा है कि क्या बिहार दिवालिया होने की कगार पर है?


दरअसल सम्राट चौधरी ने सोमवार को आकस्मिक फंड से 3662 करोड़ रुपये सामाजिक सुरक्षा पेंशन के मद में स्वीकृति प्रदान की थी। आज बुधवार को करीब 1 करोड़ पेंशन भोगियों के बैंक अकाउंट में 1100-1100 रुपये की पेंशन राशि ट्रांसफर कर दी गयी। इमरसेंजी फंड से पेंशन के लिए पैसा निकालने पर तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से यह सवाल किया है कि बिहार दिवालिया होने के कगार पर है क्या? 


तेजस्वी यादव डबल इंजन की सरकार से लगातार सवाल पूछ रहे हैं। इस बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर उन्हें बिहार के मुखिया सम्राट चौधरी से बड़ा सवाल किया है। पूछा है कि क्या बिहार दिवालिया होने के कगार पर है? क्या डबल इंजन सरकार की पूंजीपरस्त नीतियों और जनविरोधी निर्णयों से वित्तीय आपातकाल की स्थिति उत्पन्न होने वाली है?


बिहार का वित्तीय संकट इतना गंभीर हो चुका है कि कल बिहार कैबिनेट ने मई, जून और जुलाई 𝟐𝟎𝟐𝟔 की सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से 𝟑,𝟔𝟔𝟐 करोड़ रुपए निकालने की स्वीकृति प्रदान की है।आकस्मिकता निधि का उपयोग सरकार द्वारा किसी भी अप्रत्याशित संकट, प्राकृतिक आपदा या वित्तीय विपत्ति के समय जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है।


जिस प्रदेश में अब पेंशन देने के लिए आकस्मिकता निधि का उपयोग होने लगे तो समझ जाइए कि हालात कितने खराब और खतरनाक हो चुके है। 𝟔 महीनों से हम निरंतर कह रहे है और सर्वविदित भी है कि 𝟒-𝟓 महीनों से बिहार में कर्मचारियों के वेतन और पेंशन संबंधित भुगतान नहीं हो रहा है क्योंकि खजाना खाली है। एक वर्ष से अधिक समय बीतने पर भी ठेकेदारों का भुगतान नहीं हुआ है। 


नए प्रॉजेक्ट तो दूर, 𝟐𝟎𝟐𝟑-𝟐𝟒 में स्वीकृत कार्य योजनाओं का अभी तक कार्यारंभ नहीं हुआ है? 𝟐𝟎𝟐𝟓 और 𝟐𝟎𝟐𝟔 में बिना सोचे समझे की गयी घोषणाओं का तो जिक्र ही छोड़ दीजिए। बिजली में भारी कटौती की जा रही है। छात्रवृति का पैसा नहीं दिया जा रहा। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना ठप्प है। फंड की कमी के कारण कल कैबिनेट में पूर्व से चली आ रही “बिहार राज्य फ़सल सहायता योजना” को भी बंद कर दिया गया है।


बिहार के वित्तीय हालत चिंताजनक है। नियमित बजटीय प्रावधान (𝐑𝐞𝐠𝐮𝐥𝐚𝐫 𝐁𝐮𝐝𝐠𝐞𝐭𝐚𝐫𝐲 𝐏𝐫𝐨𝐯𝐢𝐬𝐢𝐨𝐧𝐬) की बजाय आकस्मिकता निधि (𝐂𝐨𝐧𝐭𝐢𝐧𝐠𝐞𝐧𝐜𝐲 𝐅𝐮𝐧𝐝) से (𝟑,𝟔𝟔𝟐) तीन हज़ार छ: सौ बासठ करोड़ रुपए की निकासी कर उस निधि से पेंशन देने जैसे निर्णय पर मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए कि दशकों से डबल इंजन सरकार होते हुए ऐसी नौबत क्यों आई? नौसिखिए मुख्यमंत्री को गैर जरूरी मुद्दों को हवा देने की बजाय अविलंब प्रदेश की दयनीय वित्तीय स्थिति को लेकर चिंतित, भयभीत और आशंकित बिहारवासियों को संबोधित करना चाहिए।