पटना: बिहार विधानसभा के पांच दिवसीय मानसून सत्र का समापन हो गया, लेकिन पूरे सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी बात की रही तो वह थी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी। पांच दिनों तक सदन में उनकी एक भी झलक नहीं दिखी। सत्ता पक्ष ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया तो विपक्ष भी स्पष्ट जवाब देने से बचता नजर आया। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर तेजस्वी यादव कहां हैं? क्या वे निजी कारणों से दिल्ली में हैं, या फिर कोई और वजह है? और अगर वे निजी कारणों से अनुपस्थित थे तो इसकी आधिकारिक जान
विधानसभा में विजय कुमार सिन्हा ने उठाया बड़ा सवाल
मानसून सत्र के अंतिम दिन उपमुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सदन में नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सदन यह जानना चाहता है कि तेजस्वी यादव सुरक्षित हैं, स्वस्थ हैं और आखिर कहां हैं?उन्होंने कहा कि पूरा सत्र समाप्त हो गया लेकिन विपक्ष की ओर से यह तक नहीं बताया गया कि नेता प्रतिपक्ष किस कारण से अनुपस्थित हैं। विजय कुमार सिन्हा ने यह भी कहा कि वे व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं कर रहे, बल्कि यह लोकतांत्रिक जवाबदेही का विषय है।
क्या RJD के विधायकों को भी नहीं पता था?
तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी पर जब अलग-अलग राजद विधायकों से सवाल किया गया तो अधिकांश नेता सीधे जवाब देने से बचते नजर आए। किसी ने मुद्दा बदल दिया तो किसी ने राजनीतिक जवाब देकर सवाल टाल दिया। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि बार-बार यही सवाल पूछने पर उन्हें हंसी आती है। उनका कहना था कि जब राजद का हर विधायक खुद को तेजस्वी यादव समझकर जनता की आवाज उठा रहा है तो इस सवाल का कोई मतलब नहीं है। जहानाबाद के विधायक राहुल शर्मा ने कहा कि पूरा बिहार कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है और मीडिया सिर्फ तेजस्वी यादव की गैरमौजूदगी पर सवाल पूछ रही है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। राजद विधायक अनीता देवी ने कहा कि विपक्ष पूरी तरह एकजुट है और उनके नेता भी मजबूत हैं। उन्होंने मीडिया से अपील की कि बिना वजह किसी तरह की गलतफहमी पैदा नहीं की जाए।
एक नेता ने बताया वजह
हालांकि अधिकांश राजद नेता स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए, लेकिन पार्टी नेता कुमार सर्वजीत ने कहा कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का दिल्ली में इलाज चल रहा है और तेजस्वी यादव उन्हीं के साथ हैं। उन्होंने यही वजह नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति की बताई।
AIMIM ने कहा- नेता प्रतिपक्ष को सबसे आगे रहना चाहिए
AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे समय जब सरकार कई अहम फैसले ले रही है और जनता से जुड़े मुद्दे सामने हैं, नेता प्रतिपक्ष को सदन में मौजूद रहकर लड़ाई लड़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता ने विपक्ष को अपनी आवाज उठाने के लिए चुना है और ऐसी परिस्थितियों में नेतृत्व की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
महागठबंधन के सहयोगी ने किया बचाव
महागठबंधन में शामिल आईआईपी के प्रमुख आईपी गुप्ता ने तेजस्वी यादव का बचाव करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष तेजस्वी यादव से डरता है। उनके अनुसार यदि तेजस्वी सदन में मौजूद होते तो सरकार के लिए जवाब देना और मुश्किल हो जाता।
भाजपा और जदयू ने साधा निशाना
भाजपा विधायक देवेश कांत सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार जनता के मुद्दे उठा रही है लेकिन विपक्ष का नेता कहां है, किसी को पता नहीं। वहीं जदयू के एमएलसी नीरज कुमार ने व्यंग्य करते हुए कहा कि शायद तेजस्वी यादव किसी अंतरराष्ट्रीय विवाद को सुलझाने गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष पूरे सत्र से गायब रहे लेकिन जनता को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। जदयू के वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सदन की कार्यवाही नियमित रूप से चलती रही और सरकार अपना काम करती रही। हालांकि उन्होंने भी माना कि विपक्ष के नेता की मौजूदगी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है।
अब सबसे बड़ा सवाल...
तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी है। एक पक्ष इसे निजी और पारिवारिक कारण बता रहा है तो दूसरा पक्ष इसे लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से दूरी बता रहा है। लेकिन कुछ सवाल अब भी जवाब मांग रहे हैं।जिसमें आखिर पूरे पांच दिन नेता प्रतिपक्ष सदन से दूर क्यों रहे? क्या उनकी अनुपस्थिति की कोई आधिकारिक सूचना विधानसभा को दी गई थी? अगर वे पारिवारिक कारणों से दिल्ली में थे तो इसकी सार्वजनिक जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई? क्या आने वाले दिनों में तेजस्वी यादव खुद इस पूरे विवाद पर सफाई देंगे? इन सवालों के जवाब फिलहाल सामने नहीं आए हैं, लेकिन मानसून सत्र खत्म होने के बाद भी यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।