पटना: सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान कथित AK-47 से फायरिंग के मामले को लेकर बिहार की सियासत बुधवार को एक बार फिर गरमा गई। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में आरजेडी ने पटना में सरकार के खिलाफ मार्च का ऐलान किया है। प्रस्तावित मार्च जेपी गोलंबर से शुरू होकर लोक भवन तक जाएगा। करीब पांच किलोमीटर लंबे इस मार्च को लेकर प्रशासन ने पटना में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शहर के प्रमुख इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।

सुबह से ही जेपी गोलंबर के आसपास आरजेडी कार्यकर्ताओं का जुटना शुरू हो गया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हाथों में तिरंगा, पार्टी नेताओं की तस्वीरें और सरकार विरोधी पोस्टर लेकर पहुंचे। कार्यकर्ताओं की ओर से सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की जा रही है। मार्च को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है।

डाकबंगला चौराहे पर पहली बार बीच सड़क बैरिकेडिंग

तेजस्वी यादव के मार्च को देखते हुए डाकबंगला चौराहे पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। यहां बीच सड़क पर बैरिकेडिंग की गई है। पुलिसकर्मियों को लाठी और इंसास राइफल के साथ तैनात किया गया है। प्रशासन की कोशिश है कि मार्च के दौरान भीड़ निर्धारित रास्ते से बाहर न निकले और यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित न हो।

पटना के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है। पुलिस अधिकारियों की ओर से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

SDM ने माइकिंग कर कार्यकर्ताओं को दी चेतावनी

मार्च से पहले प्रशासन की ओर से आरजेडी कार्यकर्ताओं को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई है। SDM की ओर से माइकिंग कर लोगों को समझाया गया कि प्रदर्शन के दौरान कानून अपने हाथ में न लें। प्रशासन ने राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा बनाए रखने की भी अपील की है। माइकिंग के जरिए लोगों को चेतावनी दी गई कि राष्ट्रीय ध्वज के अपमान से संबंधित कानूनी प्रावधान हैं। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने और किसी भी तरह की आपत्तिजनक गतिविधि से बचने को कहा है।

तिरंगे को लेकर JDU ने तेजस्वी पर साधा निशाना

मार्च के दौरान आरजेडी कार्यकर्ताओं के हाथों में तिरंगा नजर आने के बाद सत्तारूढ़ दल की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि राजनीतिक विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।

दरअसल, मार्च में शामिल होने पहुंचे आरजेडी कार्यकर्ताओं के बीच तिरंगे और तेजस्वी यादव की तस्वीर वाली तख्तियां नजर आईं। इसी को लेकर नीरज कुमार ने सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन की ओर से भी प्रदर्शनकारियों से राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और नियमों का पालन करने की अपील की गई है।

बड़े नेता भी मार्च में पहुंचे

तेजस्वी यादव के मार्च में आरजेडी के कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी शामिल होने पहुंचे। मनेर विधायक भाई वीरेंद्र और विधान पार्षद सुनील कुमार सिंह समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता सड़क पर नजर आए। कार्यकर्ताओं के हाथों में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की तस्वीरें भी दिखाई दीं।

प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ता ऐसे पोस्टर लेकर भी पहुंचे, जिनमें लालू प्रसाद यादव को भगवान के रूप में प्रदर्शित किया गया था। एक पोस्टर पर लिखा था- “चलो लगाएं नैया पार, भगवान खड़े हैं मेरे साथ।” ऐसे पोस्टरों को लेकर भी राजनीतिक विवाद बढ़ने की संभावना है।

भाई वीरेंद्र बोले- गोली खाने के लिए तैयार

मनेर विधायक भाई वीरेंद्र ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरजेडी कार्यकर्ता गोली खाने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन बिहार को पुलिस स्टेट नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के आंदोलन के दौरान सीवान और जहानाबाद में फायरिंग की गई और इसी के विरोध में युवा सड़क पर उतरे हैं। आरजेडी का आरोप है कि छात्रों के आंदोलन के दौरान बल प्रयोग और फायरिंग की घटनाओं पर सरकार को जवाब देना चाहिए। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस छावनी में तब्दील पटना, प्रशासन की नजर भीड़ पर

मार्च को लेकर पटना में सुरक्षा व्यवस्था इस स्तर तक बढ़ाई गई है कि कई प्रमुख इलाके पुलिस छावनी जैसे नजर आ रहे हैं। पुलिस की तैनाती, बैरिकेडिंग और निगरानी के बीच प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती भीड़ को नियंत्रित रखना है। अधिकारियों की ओर से लगातार अपील की जा रही है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और कोई भी व्यक्ति कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में न ले।

सीवान फायरिंग मामले को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब बिहार की सियासत में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। एक ओर आरजेडी सरकार पर छात्रों के खिलाफ कार्रवाई और फायरिंग के आरोप लगा रही है, वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है। ऐसे में बुधवार का यह मार्च राजनीतिक और प्रशासनिक, दोनों स्तरों पर बेहद अहम माना जा रहा है।