Bihar Teacher News: बिहार में हजारों शिक्षकों की नौकरी से जुड़ा मामला एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने उर्दू और बांग्ला विशेष शिक्षकों की सेवा को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का ध्यान खींचा है। तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप करे और ऐसे शिक्षकों की नौकरी बचाने के लिए प्रभावी कानूनी कदम उठाए।
तेजस्वी यादव ने अपने पत्र को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जुलाई में आए एक आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि इस फैसले के बाद बिहार के हजारों नियोजित शिक्षकों के साथ-साथ 2015 के बाद नियुक्त अप्रशिक्षित शिक्षकों की सेवा पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। इसी दायरे में 2015-16 में नियुक्त किए गए उर्दू और बांग्ला स्पेशल शिक्षकों को लेकर भी डर और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
तेजस्वी यादव का कहना है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति किसी नई नियोजन प्रक्रिया के तहत नहीं हुई थी। उर्दू और बांग्ला विशेष शिक्षकों का नियोजन साल 2014 में शुरू हुई उसी प्रक्रिया के तहत हुआ था, जिसे विभागीय आदेशों के अनुसार आगे बढ़ाया गया। ऐसे में केवल नियुक्ति की तारीख 31 मार्च 2015 के बाद होने के आधार पर इन शिक्षकों को सेवा समाप्ति के दायरे में रखना उचित नहीं होगा।
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से कहा है कि सरकार को इस पूरे मामले को केवल नियुक्ति की तारीख के आधार पर नहीं देखना चाहिए, बल्कि शिक्षकों की वर्तमान योग्यता और सेवा की स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए। उनके मुताबिक कई ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने बाद में आवश्यक ट्रेनिंग हासिल कर ली है। इनमें कई शिक्षक सक्षमता परीक्षा भी पास कर चुके हैं और वर्तमान में विशिष्ट शिक्षक, प्रधान शिक्षक या अन्य शिक्षक पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने सरकार के सामने सबसे बड़ी मांग सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की रखी है। उन्होंने कहा है कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए राज्य सरकार को मजबूती से पैरवी करनी चाहिए, ताकि वर्षों से स्कूलों में काम कर रहे शिक्षकों का भविष्य अचानक अंधकार में न चला जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन शिक्षकों ने डीएलएड, सक्षमता परीक्षा या बीपीएससी जैसी प्रक्रियाओं के जरिए अपनी योग्यता साबित की है, उन्हें उनकी वर्तमान योग्यता और सेवा को देखते हुए संरक्षण दिया जाना चाहिए। यानी जिन शिक्षकों ने आगे की जरूरी शैक्षणिक और चयन प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं, उनके मामले में सरकार को मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में प्रशासनिक खामियों का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि नियोजन से जुड़े अभिलेख गायब हैं या दस्तावेजों के रखरखाव में लापरवाही हुई है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की तय होनी चाहिए। प्रशासनिक स्तर की कमियों का खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतना चाहिए।
अब तेजस्वी यादव के इस पत्र के बाद नजर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार पर है। मामला सिर्फ कुछ शिक्षकों की नौकरी का नहीं, बल्कि उन हजारों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा है जो वर्षों से बिहार के सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में सरकार इस मामले में क्या कानूनी रास्ता अपनाती है और क्या सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की दिशा में कदम बढ़ाती है, इस पर शिक्षकों के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों की भी नजर बनी हुई है।