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11-Jan-2026 02:58 PM
By First Bihar
Tejashwi Yadav : बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव 40 दिनों के लंबे विदेश प्रवास के बाद अपने गृह राज्य लौटे हैं। राज्य लौटते ही उन्होंने सबसे पहले एक ऐसा बयान दिया है जो राजनीतिक हलकों में सुर्खियों में बना हुआ है। तेजस्वी ने कहा कि वह अगले 100 दिनों तक सरकार के खिलाफ कोई बयान नहीं देंगे, बल्कि इस दौरान सरकार की नीतियों और कार्यकाज पर नजर बनाए रखेंगे।
तेजस्वी यादव ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट कहा, “मैं अगले 100 दिनों तक इस सरकार के खिलाफ कुछ नहीं बोलूंगा। मैं देखूंगा कि यह सरकार कितने बातों पर खड़ा उतरती है और इसके कार्यकलाप किस दिशा में जा रहे हैं। उसके बाद ही मैं जनता और विपक्ष के दृष्टिकोण से प्रतिक्रिया दूंगा।” उन्होंने इस मौके पर नव वर्ष की भी शुभकामनाएं दी और कहा कि पिछले साल विधानसभा चुनाव में 'लोक' की हार हुई और 'तंत्र' की जीत हुई। उनके अनुसार, चुनाव में जनता की इच्छाओं को दबाकर मशीन और धन के जरिए परिणाम प्रभावित हुए।
नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा, “जनतंत्र को इन लोगों ने धन-तंत्र और मशीन-तंत्र बना दिया है। हम लोग चाहते हैं कि यह साफ हो कि चुनाव किस तरह जीते गए। जनता जानती है कि नई सरकार किस तरह बनी है और उसका पूरा निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए हुआ या नहीं। इस सरकार के कामकाज का आकलन अगले 100 दिनों में किया जाएगा।”
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह सरकार की घोषणाओं को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया पर भी ध्यान देंगे। उन्होंने कहा कि उनकी नजरें खासकर उन वादों पर होंगी जो सरकार ने चुनाव से पहले जनता को किए थे। उनका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि माताओं और बहनों को 2 लाख रुपये की सहायता कब मिलती है, एक करोड़ युवाओं को रोजगार कब मिलता है, और हर जिले में कारखाने लगाने की बात कितनी वास्तविकता में बदलती है, यह देखना उनका मकसद है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, तेजस्वी यादव की यह रणनीति विपक्ष की भूमिका में बदलाव का संकेत देती है। आमतौर पर नेता प्रतिपक्ष चुनाव और सरकार के शुरुआती महीनों में तीखी प्रतिक्रियाएँ देते हैं, लेकिन तेजस्वी ने यह रणनीति अपनाई है कि पहले सरकार की योजनाओं और नीतियों की वास्तविकता को समझा जाए और उसके बाद ही उनके विरोध या समर्थन में कदम उठाए जाएं।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तेजस्वी यादव की चुप्पी केवल 100 दिनों की होगी। इसके बाद उनका भाषण और प्रतिक्रिया निश्चित रूप से राज्य की राजनीति पर प्रभाव डाल सकती है। उनके विरोध का फोकस मुख्यतः युवाओं के लिए रोजगार, महिलाओं और गरीबों के कल्याण, और जिलेवार औद्योगिक विकास पर होगा।
सरकार के लिए यह एक चुनौती है कि घोषणा पत्र में किए गए वादों को पहले 100 दिनों में धरातल पर उतारें, क्योंकि विपक्ष की निगाहें हर कदम पर रहेंगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस्वी यादव की यह रणनीति जनता के बीच उनके प्रभाव को भी मापने का जरिया होगी। तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि विपक्ष अब केवल विरोध करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की नीतियों की समीक्षा और उनके क्रियान्वयन पर नजर रखने के साथ ही जनता के हितों की रक्षा भी करेगा।
इस प्रकार, बिहार की राजनीति में आने वाले 100 दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। जनता की नजरें इस बात पर होंगी कि सरकार अपने घोषणा पत्र के वादों को कितनी गंभीरता और कार्यकुशलता के साथ लागू करती है। वहीं, विपक्षी दल भी इन 100 दिनों के दौरान सरकार की वास्तविक कार्यप्रणाली का आंकलन करने के बाद ही अपनी राजनीतिक चाल चलेगा।