पटना: शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने प्रदेश के शिक्षकों के नाम संदेश जारी करते हुए उन्हें राज्य और देश के भविष्य का निर्माता बताया है। शिक्षा मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प में शिक्षा की केंद्रीय भूमिका है और इस लक्ष्य को हासिल करने की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है।
शिक्षा मंत्री की ओर से जारी संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ज्ञान, नवाचार, कौशल, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों के आधार पर भारत को विश्व का नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बनाने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शिक्षा के क्षेत्र में राज्य को आगे बढ़ाने के संकल्प का भी संदेश में उल्लेख किया गया है।
हर बच्चे तक पहुंचे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार के प्रत्येक बच्चे को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जो उसे ज्ञानवान, कुशल, संस्कारयुक्त, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाए। इसके लिए स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया है।
संदेश में शिक्षा व्यवस्था के कई प्रमुख लक्ष्यों को रेखांकित किया गया है। इनमें बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना, विज्ञान, गणित, तकनीक और अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करना तथा कौशल एवं व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना शामिल है।
इसके साथ ही विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने की बात कही गई है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बच्चों में नवाचार और रचनात्मकता की भावना विकसित होनी चाहिए और प्रत्येक बच्चे को उसकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
‘शिक्षक इस लक्ष्य की प्राप्ति में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी’
मिथिलेश तिवारी ने अपने संदेश में शिक्षकों की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्यों को जमीन पर उतारने में शिक्षक सबसे अहम कड़ी हैं। शिक्षा मंत्री ने शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार के शिक्षकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार उनके मान-सम्मान, गरिमा और आवश्यकताओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि सभी मिलकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने का संकल्प लें।
मंत्री के संदेश में कहा गया कि हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना, हर विद्यार्थी की प्रतिभा पहचानना और उसे सफलता के शिखर तक पहुंचाना शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी है। साथ ही बच्चों को एकलव्य जैसा शिष्य तैयार करने, शिक्षा में संस्कार और आधुनिकता का समन्वय करने तथा बिहार की गौरवशाली ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य भी सामने रखा गया है।
नालंदा की ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प
शिक्षा मंत्री ने बिहार की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा की महान भूमि रहा है। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार की धरती सदियों से शिक्षा, दर्शन, अध्यात्म और ज्ञान का मार्ग पूरी दुनिया को दिखाती रही है।
संदेश में भगवान श्रीराम और बक्सर से जुड़े संदर्भ का भी उल्लेख किया गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार की मिट्टी का संबंध केवल इतिहास से नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा की मूल चेतना से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि नालंदा कभी दुनिया के महानतम शिक्षा केंद्रों में शामिल रहा और देश-विदेश से विद्यार्थी यहां ज्ञान प्राप्त करने आते थे। अब संकल्प है कि आधुनिक युग की जरूरतों के अनुरूप बिहार में उसी ज्ञान परंपरा को फिर से स्थापित किया जाए।
ज्ञान के साथ संस्कार और विज्ञान के साथ विवेक
शिक्षा मंत्री ने बिहार में ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की बात कही, जिसमें ज्ञान के साथ संस्कार, विज्ञान के साथ विवेक, तकनीक के साथ मानवीय संवेदना और आधुनिकता के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का गौरव कायम रहे।उन्होंने कहा कि शिक्षक ही बिहार के भविष्य के निर्माता हैं। आज कक्षा में बैठा प्रत्येक विद्यार्थी बिहार और भारत के भविष्य का संभावित निर्माता है। उसके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानना, उसे सही दिशा देना, उसके मन में आत्मविश्वास जगाना और उसके सपनों को उड़ान देना शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
शिक्षक के आचरण का विद्यार्थियों पर पड़ता है प्रभाव
संदेश में शिक्षा मंत्री ने केवल पाठ्यक्रम और विषय ज्ञान तक शिक्षक की भूमिका को सीमित नहीं माना। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने शिक्षक से सिर्फ विषय का ज्ञान नहीं सीखता, बल्कि शिक्षक के व्यवहार, विचार, अनुशासन, संवेदनशीलता और व्यक्तित्व से भी बहुत कुछ सीखता है। इसी कारण शिक्षक का प्रत्येक शब्द, प्रत्येक कर्म और प्रत्येक व्यवहार विद्यार्थी के जीवन पर स्थायी प्रभाव डाल सकता है। शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों की इस जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए उनके त्याग, तपस्या, परिश्रम और समर्पण को नमन किया।
‘गुरु का सम्मान वास्तव में ज्ञान का सम्मान’
शिक्षा मंत्री ने भारतीय संस्कृति में गुरु के स्थान को सर्वोच्च बताते हुए गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह जीवन को दिशा देने वाला, संस्कारों का संवाहक, व्यक्तित्व का निर्माता और राष्ट्र निर्माण का प्रथम शिल्पकार होता है।
उन्होंने संत कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे का उल्लेख करते हुए गुरु की महिमा को रेखांकित किया—
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय॥”
शिक्षा मंत्री ने कहा कि जब गुरु और गोविंद दोनों सामने खड़े हों तो पहले गुरु को प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि गुरु ही गोविंद तक पहुंचने का मार्ग दिखाते हैं।
शिक्षकों को दी शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं
मिथिलेश तिवारी ने शिक्षक दिवस को केवल उत्सव नहीं, बल्कि कृतज्ञता, सम्मान और आत्ममंथन का अवसर बताया। उन्होंने महान दार्शनिक एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति को नमन करते हुए देश के प्रत्येक शिक्षक के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
अपने संदेश के अंत में शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों के त्याग और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि बिहार के शिक्षक अपने ज्ञान, तपस्या, परिश्रम और समर्पण से आने वाली पीढ़ियों का भविष्य उज्ज्वल बनाएंगे।उन्होंने कहा कि “गुरु का सम्मान वास्तव में ज्ञान का सम्मान है।” इसके साथ ही बिहार के सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी। शिक्षा मंत्री का यह संदेश बिहार की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ संस्कार, कौशल, तकनीक, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा को जोड़ने की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखता है। संदेश का मूल केंद्र शिक्षक हैं, जिन्हें बिहार के भविष्य और नई पीढ़ी के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।