CHHAPRA: सारण से भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिहार में किसी राजपूत को किसी नेता पर भरोसा नहीं है। रूडी के इस बयान की चर्चा बिहार की राजनीतिक गलियारों में खूब हो रही है। इसी क्रम में आरजेडी से राजपूत समाज के नेता और राबड़ी देवी के मुंहबोले भाई डॉ. सुनील कुमार सिंह का बयान सामने आया है। सुनील सिंह ने कहा है कि राजीव प्रताप रूडी ने अपनी दिल की पीड़ा को व्यक्त करने का काम किया है। उन्होंने बीजेपी की सच्चाई को सबके सामने रखा है।
पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए आरजेडी नेता सुनील कुमार सिह ने आगे कहा कि भले विलंब से ही सही लेकिन राजीव प्रताप रूडी ने सच्चाई उजागर किया है। भारतीय जनता पार्टी में भूमिहार, राजपूत और सवर्ण जाति के जो भी लोग हैं, उनकी कोई इज्जत बीजेपी में नहीं है। यह बात खुद राजीव प्रताप रूडी ने स्वीकार किया है। जबकि लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल में जो दो एमएलसी जीत कर आए हैं, दोनों सवर्ण जाति के हैं। सदन में आज भी 6 लोगों से ऊपर सवर्ण जाति से हैं।
लालू-राबड़ी की सरकार का जिक्र करते हुए सुनील कुमार सिंह ने कहा कि एक समय वह भी था कि बिहार में जब 11 एमएलए राजपूत के हुआ करते थे, तो लालू जी के मंत्रिमंडल में 9 लोग मंत्री थे। 11 विधायकों में 9 मंत्री सवर्ण जाति से थे। जिस समय आरजेडी के 4 सांसद थे, उस समय दो सांसद जगदानंद बाबू रघुवंश बाबू यह दोनों सांसद हुए। तेजस्वी यादव ए टू ज जेड की बात करते हैं, तो यह धरातल पर दिखता है। उनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है। कथनी और करनी में अंतर तो भाजपा में देखने को मिलती है।
उन्होंने आगे कहा कि रूडी जी का यह व्यक्तिगत राय हो सकता है, उनकी व्यक्तिगत कुंठा हो सकती है। इसका कारण यह है कि रूडी जी काफी सीनियर लीडर हैं, अगर बिहार में दो चार पांच सीनियर लीडर की बात की जाए तो उसमें राजीव प्रताप रूडी जी भी हैं। जो छपरा से लगातार सांसद भी हैं, उनको ऐसा लगता है की धाहूं मंगरु टाइप का चीज कैबिनेट मंत्री हो गया। जिसकी कोई पहचान नहीं हैं, उसके साथ ना कोई जनता जनार्दन है लेकिन ऐसे लोग मंत्री बने हुए हैं, लेकिन रूडी जैसे लोगों को किनारा लगा दिया गया है। रूडी ने अपनी दिल की पीड़ा को व्यक्त करने का काम किये हैं और सच्चाई का बखान किये हैं।
दरअसल छपरा में जिला प्रशासन के एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने यह बातें कही। उनका यह बयान सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम को लेकर एनडीए में उठे विवाद के बीच आया है। रूडी ने भाजपा नेतृत्व को यह तय करने की नसीहत दी कि पार्टी राजपूतों को कितना महत्व दे रही है और उनके कहने पर कोई दूसरा व्यक्ति अपनी बात मानने को कितना तैयार होगा।
आनंद पुष्कर ने भाजपा नेतृत्व पर लगाए थे आरोप
दरअसल, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. राहुल राज की जीत और जदयू प्रत्याशी आनंद पुष्कर की हार के बाद गठबंधन के भीतर बयानबाजी शुरू हो गई है। जदयू नेता आनंद पुष्कर ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर स्थानीय भाजपा नेतृत्व पर छल और साजिश का आरोप लगाया था।
उन्होंने सवाल उठाया था कि जब चुनाव में वोट मांगने की बारी आती है, तब नीतीश कुमार के विकास कार्यों को आगे रखकर समर्थन मांगा जाता है, लेकिन जब गठबंधन के समर्पित कार्यकर्ता और जदयू प्रत्याशी के साथ खड़े होने की बारी आती है तो गठबंधन धर्म कहां चला जाता है? क्या गठबंधन धर्म का पालन सिर्फ जदयू ही करेगी?
आनंद पुष्कर के आरोपों का रूडी ने दिया जवाब
आनंद पुष्कर के आरोपों को लेकर जब मीडिया ने राजीव प्रताप रूडी से सवाल किया कि क्या उनके कहने पर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान से हट सकते थे और एनडीए उम्मीदवार की जीत हो सकती थी, तो उन्होंने कहा कि बिहार में किसी राजपूत को किसी नेता पर भरोसा नहीं है।
रूडी ने इस बात पर भी सवाल खड़ा किया कि भाजपा को यह तय करना होगा कि वह राजपूतों को कितना महत्व दे रही है। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर राजपूत नेताओं की राजनीतिक भूमिका और प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
रूडी के बयान से एनडीए में नई चर्चा
राजीव प्रताप रूडी के इस बयान के बाद सारण से लेकर पटना तक सियासी हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जदयू नेता आनंद पुष्कर ने चुनाव में गठबंधन धर्म के पालन पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा सांसद रूडी ने अपनी ही पार्टी के नेतृत्व को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
आरजेडी नेता सुनील कुमार सिंह ने आगे कहा कि भले ही देर से सही, लेकिन राजीव प्रताप रूडी ने सच्चाई उजागर की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी में भूमिहार, राजपूत और अन्य सवर्ण जातियों के नेताओं को कोई सम्मान नहीं मिलता। #SunilKumarSingh #RajivPratapRudy #BJP #RJD #BiharPolitics #BiharNews #FirstBiharJharkhand
— FirstBiharJharkhand (@firstbiharnews) November 4, 2026