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Attack On Anant Singh:आखिर कौन हैं वह गैंग जिसने मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह पर किया जानलेवा हमला, जिसके नाम सुनते ही मोकामा प्रखंड में मच जाता है हडकंप

Attack On Anant Singh: सोनू मोनू ने साल 2009 में अपराध की दुनिया में कदम रखा. ये दोनों भाइयों ने ट्रेन में लूटपाट करने लगे.इसके एक फ़ोन से मोकामा

23-Jan-2025 07:54 AM

By First Bihar

Attack On Anant Singh: बिहार के मोकामा प्रखंड के नौरंगा जलालपुर गांव में बुधवार को मोकामा के पूर्व विधायक अनंत कुमार सिंह पर कुख्यात अपराधी सोनू-मोनू गैंग ने जमकर फायरिंग की है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव है। इस घटना के बाद बाढ़ डीएसपी कैंप कर रहे हैं, इसके साथ ही नौरंगा गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। 


वहीं,घटना को अंजाम देने के बाद सोनू-मोनू गैंग के सभी सदस्य मौके से फरार है। ऐसे में अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि यह सोनू-मोनू गैंग हैं कौन ? तो आइए हम आपको इसका जवाब देते हैं। सोनू औरमोनू दोनों भाई है, जो जलालपुर गांव के निवासी हैं। अनंत सिंह और सोनू मोनू शुरुआती दौर से ही एक दुसरे के विरोधी रहे हैं। इसकी वजह इनकी जान पहचान अनंत सिंह के विरोधी गुट से होना बताया जाता है। हालांकि,अनंत सिंह के जेल से रिहा होने के बाद सोनू-मोनू और पूर्व विधायक के रिश्ते में सुधार हुए थे। लेकिन बुधवार को एक बार फिर वर्चस्व को लेकर वारदात हुई है।


दरअसल, 15 साल पहले ट्रेन में लूटपाट के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले सोनू-मोनू पंचमहला ओपी (मराची थाना) के जलालपुर गांव के निवासी हैं। सोनू और मोनू यूपी के बाहुबली रहे मुख्तार अंसारी की टीम का एक अहम हिस्सा रहा है। यह दोनों मुख्य रूप से बिश्नोई ग्रुप की तरह अपना एक गुट बनाने के फ़िराक में हैं। इस गैंग ने पहले भी अनंत सिंह के हत्या की साजिश रची थी। साल 2017 में सोनू-मोनू गैंग के कुख्यात मोनू सिंह ने अनंत सिंह की हत्या के लिए 50 लाख रुपये की सुपारी ली थी। 


इसके साथ ही अपनी धाक जमाने के लिए सोनू-मोनू का गांव में ही दरबार लगने लगा। इसके बाद दोनों भाइयों के पास ऐसे लोग आने लगे, जिनकी समस्या विभागीय अधिकारी दूर नहीं कर पाते थे। सोनू-मोनू के दरबार में परेशान लोग आने लगे। इधर सफेदपोश से इन दोनों भाइयों की सांठ-गांठ भी मजबूत होने लगी और कई ऐसे लोगों से भी जान पहचान हुई और सीधे सरकार में बड़ी पकड़ रखते हैं। 


अब अपनी इसी पकड़ के वजह से यह दोनों भाइयों का मोकामा प्रखंड और अंचल कार्यालय के अधिकारियों व कर्मियों पर ऐसा खौफ है कि फोन पर आवाज सुनते ही समस्या का समाधान हो जाता है। वैसे तो दिखाने के लिए यह दोनों भाई समाजसेवा की बात करने लगे, लेकिन इनके इरादे खतरनाक थे। लोगों की नजर में दोनों हीरो बन गए, पर पर्दे के पीछे रंगदारी से लेकर लूटपाट और सुपारी लेकर मर्डर करना दूसरा पेशा बन गया। 


वहीं, सफेदपोश के साथ अच्छी पकड़ की वजह से दोनों भाई सियासत में कदम रखना जरूरी समझा। ऐसे में दोनों भाइयों ने नौरंगा जलालपुर पंचायत से बहन को मुखिया निर्वाचित करा दिया, लेकिन प्रतिद्वंदियों ने शपथ पत्र में त्रुटि की शिकायत पर उसे अयोग्य घोषित करा दिया मुखिया का पुन: उपचुनाव में गुड्डू सिंह अपने परिजन को उतारना चाहता था। उसके इरादे को भापकर दोनों भाइयों ने बाढ़ जेल से कोर्ट में पेशी के दौरान उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची. इस काम को करने के लिए नौबतपुर के कुख्यात मनोज सिंह को सौंपा गया था। मनोज ने सोनू-मोनू के इशारे पर कोर्ट परिसर में ही गुड्डू को रास्ते से हटा दिया। इस मामले में पुलिस ने दोनों भाइयों, उसके पिता और मुखिया बहन को नामजद अभियुक्त बनाया था। 


इधर, सोनू-मोनू के खिलाफ मोकामा जीआरपी में कई मामले दर्ज हैं। यह  सभी ट्रेन में लूटपाट से संबधित हैं. पटना के अगमकुआं थाना क्षेत्र में हथियार बरामदगी मामले में मोनू बेउर जेल में भी कई महीनों तक सजा काट चुका है। वहीं झारखंड से लेकर लखीसराय जिले के कई थाना क्षेत्रों में उस पर एक दर्जन से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हैं। दोनों भाई बड़े से बड़े अपराध इतनी सफाई से अंजाम देते रहे हैं कि पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लग पाती थी।