पटना: मां दुर्गा की आराधना का सबसे पावन पर्व शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो गया है। राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में नवरात्र को लेकर भक्तों में उत्साह है। मंदिरों, घरों और पूजा पंडालों में कलश स्थापना के साथ नौ दिवसीय पूजा का शुभारंभ होगा। हालांकि इस बार तिथियों में वृद्धि के कारण नवरात्र का पर्व 10 दिनों तक चलेगा। खास बात यह है कि इस वर्ष अष्टमी तिथि दो दिन पड़ रही है।

नवरात्र के पहले दिन आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के साथ चित्रा नक्षत्र, वैधृति योग, द्विपुष्कर योग, बव करण और तुला लग्न का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना शुरू करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।First Bihar की ओर से आप सभी को शारदीय नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं। मां दुर्गा की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास हो। जय माता दी।

गज पर होगा मां दुर्गा का आगमन और विदाई

इस बार नवरात्र में देवी दुर्गा का आगमन और विदाई दोनों ही गज यानी हाथी पर होगी। ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश झा के अनुसार नवरात्र के पहले दिन रविवार होने के कारण देवी का आगमन गज पर माना जा रहा है। वहीं विजयादशमी बुधवार को पड़ने के कारण देवी की विदाई भी हाथी पर होगी।

धार्मिक मान्यताओं में देवी का गज पर आगमन बेहद शुभ माना गया है। इसे अच्छी बारिश, कृषि के लिए अनुकूल परिस्थितियों, आर्थिक उन्नति और सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है। वहीं गज पर देवी की विदाई को भी शुभ और सौख्य प्रदान करने वाला बताया गया है।

कलश स्थापना से शुरू होगा महाअनुष्ठान

नवरात्र के पहले दिन घरों और पूजा पंडालों में विधि-विधान से कलश स्थापना की जाएगी। वेदोक्त मंत्रों के साथ घट स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा शुरू होगी। इसके बाद भक्त दुर्गा सप्तशती, रामचरितमानस, सुंदरकांड, रामरक्षा स्तोत्र, दुर्गा सहस्रनाम, अर्गला स्तोत्र, कवच और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र आदि का पाठ करेंगे।

धार्मिक मान्यता है कि कलश में देवी-देवताओं और पवित्र नदियों का वास होता है। इसलिए नवरात्र में कलश पूजन को विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धालु इस दौरान व्रत रखकर मां भगवती की साधना करेंगे और परिवार की सुख-शांति की कामना करेंगे।

अलग-अलग परंपराओं से होगी मां की पूजा

पटना समेत बिहार के अलग-अलग हिस्सों में मां दुर्गा की पूजा कई परंपराओं के अनुसार की जाती है। कहीं वैदिक पद्धति से पूजा होती है तो कहीं बंगाली और शाक्त परंपरा के अनुसार मां की आराधना की जाती है।

पूजा की विधि, भोग और आरती में भी इन परंपराओं के अनुसार अंतर देखने को मिलता है। वैदिक पद्धति में कलश के ऊपर नारियल रखा जाता है, जबकि शाक्त परंपरा में अलग विधान से पूजा की जाती है। राजधानी के मंदिरों और पूजा पंडालों में अगले कई दिनों तक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से माहौल भक्तिमय रहने वाला है।

दो दिन होगी महागौरी की पूजा

इस बार नवरात्र का सबसे खास संयोग अष्टमी तिथि का दो दिन पड़ना है। महाष्टमी की तिथि 18 अक्टूबर रविवार को पूरे दिन-रात रहेगी और 19 अक्टूबर सोमवार की सुबह 8:04 बजे तक अष्टमी तिथि रहेगी। उदयातिथि के आधार पर 19 अक्टूबर को भी अष्टमी मानी जाएगी। इसी वजह से इस बार नवरात्र का पर्व 10 दिनों का हो गया है। महासप्तमी 17 अक्टूबर, महाष्टमी 18 और 19 अक्टूबर तथा महानवमी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इसके बाद विजयादशमी के साथ मां दुर्गा की विदाई होगी।

देवी के आगमन का वाहन देता है विशेष संकेत

धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्र के पहले दिन पड़ने वाले वार से देवी के आगमन का वाहन तय होता है। रविवार और सोमवार को देवी का आगमन गज पर, मंगलवार और शनिवार को घोड़े पर, गुरुवार और शुक्रवार को डोली पर तथा बुधवार को नौका पर माना जाता है।इसी तरह विजयादशमी के दिन के वार के आधार पर देवी की विदाई का वाहन तय होता है। इस बार बुधवार को विजयादशमी होने के कारण देवी की विदाई हाथी पर होगी। मान्यता है कि गज पर देवी के आगमन से अच्छी बारिश और सुख-समृद्धि के योग बनते हैं। वहीं देवी के वाहन के आधार पर वर्ष के सामाजिक, कृषि और प्राकृतिक परिस्थितियों के बारे में भी धार्मिक संकेत माने जाते हैं।

लगातार दूसरे साल बढ़ी नवरात्र की अवधि

शारदीय नवरात्र में लगातार दूसरे वर्ष तिथि की वृद्धि देखने को मिल रही है। वर्ष 2025 में चतुर्थी तिथि दो दिन पड़ने के कारण नवरात्र 10 दिनों का हुआ था। इस वर्ष अष्टमी तिथि की वृद्धि के कारण नवरात्र की अवधि फिर 10 दिनों की हो गई है।नवरात्र के इन दस दिनों में भक्त मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करेंगे। घरों से लेकर मंदिरों और पूजा पंडालों तक देवी आराधना का दौर चलेगा। भक्त व्रत, पूजा, पाठ और भजन-कीर्तन के जरिए मां भगवती का आशीर्वाद लेने की कामना करेंगे।

First Bihar की ओर से एक बार फिर सभी श्रद्धालुओं को शारदीय नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाएं। मां दुर्गा आपके परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें और सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आएं। जय माता दी।