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20-Mar-2026 11:10 AM
By First Bihar
Bihar News : बिहार की राजनीति में इन दिनों “सम्राट मॉडल” बनाम “नीतीश मॉडल” को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासकर गृह विभाग भाजपा नेता सम्राट चौधरी के पास जाने के बाद इस बहस ने और जोर पकड़ लिया है। इसी मुद्दे पर जब जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार से सवाल किया गया कि क्या अब बिहार में “नीतीश मॉडल” खत्म हो रहा है, तो उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में इस पर स्पष्ट और सख्त प्रतिक्रिया दी।
नीरज कुमार ने कहा कि “नीतीश मॉडल” कोई नया या सीमित अवधारणा नहीं है, बल्कि इसे देश के शीर्ष नेतृत्व तक ने समय-समय पर स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने भी सार्वजनिक मंचों से नीतीश कुमार के कामकाज की सराहना की है। यहां तक कि जब बिहार में महागठबंधन की सरकार थी, तब भी पटना के गांधी मैदान से नीतीश कुमार के शराबबंदी जैसे साहसिक फैसलों की तारीफ की गई थी।
उन्होंने आगे कहा कि गृह विभाग अब सम्राट चौधरी के पास है, तो स्वाभाविक है कि वह अपने विभाग के कामों को लेकर सक्रिय रहेंगे और बयान देंगे। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई “सम्राट मॉडल” अस्तित्व में आ गया है। नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि अगर हर विभाग के काम को “मॉडल” कहा जाए, तो फिर हर मंत्री के नाम पर एक नया मॉडल बन जाएगा—चाहे वह मदन सहनी हों, अशोक चौधरी हों या विजेंद्र यादव।
नीरज कुमार ने साफ तौर पर कहा कि बिहार में एक ही मॉडल चल रहा है और वह है “नीतीश मॉडल”। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि राज्य के सुप्रीमो नीतीश कुमार हैं और उनकी नीतियों, निर्णयों और प्रशासनिक शैली का ही प्रभाव पूरे शासन में दिखता है। उन्होंने कहा कि जनता के मन में आज भी नीतीश कुमार की छवि और उनके कामों की गहरी छाप है।
इस दौरान उन्होंने “ऑपरेशन लंगड़ा” जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया, जिसे लेकर हाल के दिनों में कानून-व्यवस्था पर चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार गंभीर है और कानून का राज स्थापित करना प्राथमिकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की कार्रवाइयों को किसी “मॉडल” का नाम देना केवल खबर बनाने की कोशिश है।
नीरज कुमार ने यह भी कहा कि भाजपा के प्रवक्ता नीरज कुमार ने गृह विभाग के संदर्भ में जो बातें कही हैं, उन्हें गलत तरीके से “सम्राट मॉडल” बनाम “नीतीश मॉडल” की बहस में घसीटा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग जानबूझकर इस तरह के मुद्दों को हवा दे रहे हैं, ताकि राजनीतिक भ्रम पैदा किया जा सके।
अंत में उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में “मॉडल” की असली पहचान जनता तय करती है और आज भी जनता के बीच नीतीश कुमार का ही मॉडल प्रभावी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर लोगों के मन में सवाल जरूर हैं, लेकिन उनके नेतृत्व और कामकाज पर भरोसा कायम है।कुल मिलाकर, जेडीयू ने साफ कर दिया है कि बिहार में किसी नए “मॉडल” की नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के स्थापित प्रशासनिक ढांचे की ही चर्चा होनी चाहिए।