PATNA: बिहार में सरकारी खजाने की हालत पिछले पांच महीने से बदहाल है. सरकार जैसे-तैसे वेतन जुटा रही है. विकास कार्यों के लिए पैसा नहीं जुट पा रहा है. लेकिन राज्य सरकार ने इसी बीच करीब डेढ़ दर्जन विधायकों और विधानपार्षदों के बीच रेवड़ी बांट दिया है. ऐसे तमाम एमएलए और एमएलसी को मंत्री का दर्जा दे दिया गया है, उन्हें मंत्रियों जैसी तमाम सुख सुविधायें मिलेंगी. 


विधान सभा औऱ परिषद में सचेतकों की नियुक्ति

दरअसल, बिहार सरकार में शामिल पार्टियों यानि सत्तारूढ गठबंधन ने विधान सभा औऱ विधान परिषद में अपने मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक और सचेतकों की नियुक्ति की है. ऐसे तमाम लोगों को कैबिनेट मंत्री से लेकर राज्य मंत्री औऱ उप मंत्री जैसी सुख सुविधायें मिलेंगी. कुल 17 विधायकों और विधान पार्षदों को सरकार का तोहफा मिला है. 


विधानसभा में 11 विधायकों को मंत्री का दर्जा

बिहार विधानसभा में बीजेपी विधायक संजीव चौरसिया विधानसभा में सत्तापक्ष के मुख्य सचेतक बनाए गए हैं. इसके साथ ही जेडीयू के विधायक मनजीत कुमार सिंह को उप मुख्य सचेतक बनाया गया है. दोनों को कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है. यानि मंत्रियों की तरह वेतन-भत्ता, स्टाफ, गाड़ी सब मिलेगा.  


सत्तारूढ़ गठबंधन ने विधानसभा में 9 विधायकों को सचेतक बनाया है. इन सभी को भी मंत्री का दर्जा यानि सुख सुविधा हासिल होंगी. जो विधायक सचेतक बनाये गये हैं, उनमें गायत्री देवी, राजू तिवारी, रामविलास कामत, सुधांशु शेखर, राणा रणधीर, विनय चौधरी, कृष्ण कुमार ऋषि, अरुण मांझी और रत्नेश कुमार शामिल हैं. 


विधान परिषद में भी बंटी रेवड़ी

बिहार विधान परिषद में ललन कुमार सर्राफ और राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को सत्तारूढ़ गठबंधन का उप नेता बनाया गया है. दोनों को मंत्री की तरह निजी स्टाफ, सुख-सुविधा, बंगला और गाड़ी मिलेगा. सत्तारूढ़ गठबंधन ने विधान परिषद में संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी मुख्य सचेतक बनाया है. उन्हें भी मंत्री का दर्जा मिलेगा. बीजेपी के जनक राम को उप मुख्य सचेतक बनाया गया है औऱ उन्हें भी राज्य मंत्री की सुख सुविधा मिलेगी. वहीं, नीरज कुमार और रीना देवी सचेतक बनाया गया है, दोनों को उप मंत्री वाली सारी सुविधायें मिलेंगी.