Bihar CM : बिहार की राजनीति में आज एक बड़ा और ऐतिहासिक दिन माना जा रहा है। राज्य को उसका अगला मुख्यमंत्री मिल गया है। सम्राट चौधरी अब से कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। इस ऐलान के साथ ही बिहार की सियासत में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। ऐसे में आइए एक नजर डालते हैं उनके राजनीतिक सफर पर, जिसने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
सम्राट चौधरी बीजेपी के उन नेताओं में गिने जाते हैं जो आरएसएस की पारंपरिक पृष्ठभूमि से नहीं आते, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और रणनीतिक कौशल के दम पर पार्टी में शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी राजनीति की जड़ें उनके परिवार से जुड़ी हुई हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे हैं। वे समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और समय-समय पर कई बड़े राजनीतिक दलों के साथ जुड़े रहे।
शकुनी चौधरी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा। वे कभी नीतीश कुमार के करीबी रहे, तो कभी लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी में भी सक्रिय भूमिका निभाई। कुशवाहा समाज में उनकी मजबूत पकड़ और वर्षों का राजनीतिक अनुभव सम्राट चौधरी के लिए एक मजबूत आधार बना। यही वजह है कि सम्राट चौधरी को राजनीति में एक मजबूत विरासत मिली, जिसने उनके सफर को दिशा दी।
सम्राट चौधरी ने साल 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। शुरुआती दौर में उन्होंने संगठन में काम करते हुए अपनी पहचान बनाई। बिहार विधान परिषद की वेबसाइट के अनुसार, 1995 में एक राजनीतिक मामले में उन्हें 89 दिनों के लिए जेल भी जाना पड़ा, जो उनके संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन का हिस्सा रहा।
उनकी चुनावी यात्रा की बात करें तो साल 2000 में उन्होंने परबत्ता विधानसभा सीट से आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा में एंट्री की। हालांकि, 2005 के चुनाव में उन्हें जेडीयू के रामानंद सिंह से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2010 में एक बार फिर इसी सीट से जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की।
2014 का साल उनके करियर में एक अहम मोड़ लेकर आया। लोकसभा चुनाव में जेडीयू के खराब प्रदर्शन के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़कर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया। उस समय सम्राट चौधरी ने मांझी का समर्थन किया और उन्हें नगर विकास विभाग का मंत्री भी बनाया गया। इसी दौरान उन्होंने आरजेडी से इस्तीफा देकर जेडीयू का दामन थाम लिया।
हालांकि, उनका राजनीतिक सफर यहीं नहीं रुका। साल 2017 में उन्होंने जेडीयू से भी अलग होकर बीजेपी का रुख किया। बीजेपी में शामिल होने के बाद उनका कद लगातार बढ़ता गया। संगठन में उनकी सक्रियता और रणनीतिक समझ के चलते उन्हें मार्च 2023 में बिहार बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।
इसके बाद 2024 में बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ, जब नीतीश कुमार ने आरजेडी से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बनाई। इस सरकार में सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई।
अब 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की जीत के बाद सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना उनके लंबे राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा मुकाम माना जा रहा है। एक ऐसे नेता के रूप में, जिन्होंने संघर्ष, रणनीति और विरासत—तीनों का संतुलन साधा, वे आज बिहार की कमान संभालने जा रहे हैं। बिहार की जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री के रूप में राज्य को किस दिशा में आगे ले जाते हैं।