Bihar News : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता, उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में लोक सेवा आवास में आयोजित खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की समीक्षात्मक बैठक में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और पीएनजी की आपूर्ति स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। साथ ही निजी स्कूलों की फीस व्यवस्था और अभिभावकों के अधिकारों को लेकर भी बड़ा निर्णय लिया गया।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से अपील की कि वे केवल आवश्यक होने पर ही चार पहिया वाहनों का उपयोग करें और ईंधन की बचत को प्राथमिकता दें। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य में स्वच्छ ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन को अपनाना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है, इसलिए लोगों को किसी प्रकार की घबराहट या पैनिक करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने संबंधित विभागों और तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिया कि आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक मजबूत और सुचारू बनाया जाए ताकि किसी भी क्षेत्र में कमी न हो।
बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव अभय सिंह ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया, जिसमें बिहार में पेट्रोलियम उत्पादों की खपत, आपूर्ति और भंडारण की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक लगभग 1 लाख 12 हजार पीएनजी कनेक्शन सक्रिय हैं, जबकि 25,813 नए आवेदन प्राप्त हुए हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ आवासीय परिसरों और अपार्टमेंट में पीएनजी कनेक्शन की सुविधा तेजी से बढ़ाने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी कहा कि कॉलोनियों और अपार्टमेंट परिसरों में पीएनजी कनेक्शन की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जाए, जिससे लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आम नागरिकों को सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराना है।
इस बैठक में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह और संजय सिंह सहित तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शिक्षा क्षेत्र में भी एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसका सीधा असर निजी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों पर पड़ेगा। सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर रोक लगाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि अब कोई भी निजी विद्यालय मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेगा।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि निजी स्कूलों द्वारा पुनर्नामांकन शुल्क या किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित शुल्क की वसूली पूरी तरह से बंद की जाए। अभिभावकों से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त या अनावश्यक शुल्क लेना अब नियमों के खिलाफ माना जाएगा और इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सभी निजी विद्यालयों को अपनी फीस संरचना सार्वजनिक करनी होगी, ताकि अभिभावक पूरी जानकारी के साथ निर्णय ले सकें।
इसके अलावा, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब स्कूल किसी भी अभिभावक को निर्धारित दुकान या विशेष ब्रांड से किताबें, कॉपी या अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकेंगे। अभिभावक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी विक्रेता या दुकान से सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे। इसी तरह स्कूलों द्वारा तय दुकान से ही यूनिफॉर्म खरीदने की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है।
सरकार के इस फैसले को शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है, जिससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि अभिभावकों को आर्थिक राहत भी मिलेगी। राज्य सरकार का दावा है कि यह कदम छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा की दिशा में एक मजबूत पहल है। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की इस बैठक और फैसलों को राज्य में ऊर्जा प्रबंधन, उपभोक्ता सुरक्षा और शिक्षा सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।