Bihar News : बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव के बीच एनडीए के भीतर की सियासी हलचल ने नया मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर बुधवार को हुई एनडीए की अहम बैठक में चुनावी रणनीति के साथ उस विवाद पर भी चर्चा हुई, जिसने जेडीयू की मुश्किल बढ़ा रखी है। मामला है मोकामा विधायक अनंत सिंह और जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के बीच बढ़ती दूरी का। दिलचस्प बात यह है कि बैठक में खुद सम्राट चौधरी ने सवाल उठाया कि आखिर अनंत और नीरज के बीच विवाद क्या है?


दरअसल, विधान परिषद चुनाव में एनडीए ने सभी आठ सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है। इसके लिए गठबंधन के नेताओं ने तय किया कि अलग-अलग दलों के बजाय एनडीए के नाम और साझा ताकत के साथ प्रचार किया जाएगा। यानी चुनावी मैदान में भाजपा, जेडीयू, हम और दूसरे सहयोगी दल अपनी-अपनी पहचान से ज्यादा गठबंधन की एकजुटता दिखाएंगे। लेकिन इसी एकजुटता के बीच अनंत सिंह और नीरज कुमार का मामला बैठक में स्वाभाविक तौर पर पहुंच गया।


मोकामा के विधायक अनंत सिंह खुले तौर पर जेडीयू के विधान परिषद उम्मीदवार नीरज कुमार के समर्थन में नजर नहीं आ रहे हैं। यही बात गठबंधन के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अनंत किसे वोट दिलाएंगे, बल्कि सवाल यह भी है कि उनके राजनीतिक रुख का असर जेडीयू के चुनावी समीकरण पर कितना पड़ेगा।


बताया गया कि बैठक में जब नीरज कुमार को लेकर अनंत सिंह के विरोध का मुद्दा उठा तो घटक दलों को अपने स्तर पर मामला सुलझाने की सलाह दी गई। साथ ही जिन सहयोगी दलों के उम्मीदवारों को लेकर विवाद है, उनसे नामांकन वापस कराने की दिशा में भी बात हुई। नामांकन वापसी की आखिरी तारीख 9 अक्टूबर है। ऐसे में एनडीए के सामने समय भी कम है और अंदरूनी समीकरण साधने की चुनौती भी बड़ी है।


अनंत सिंह और नीरज कुमार की सियासी खींचतान को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दोनों के बीच ऐसा क्या हुआ कि मामला एनडीए की शीर्ष बैठक तक पहुंच गया? क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत राजनीतिक मतभेद है या इसके पीछे मोकामा और आसपास के इलाके की राजनीति का कोई बड़ा समीकरण छिपा है? यही वह सवाल है, जिसे लेकर अब बिहार की सियासत में चर्चा तेज हो गई है।


बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एनडीए नेताओं से साफ तौर पर साझा प्रचार पर जोर दिया। उनका संदेश था कि उम्मीदवार किसी एक दल का हो सकता है, लेकिन चुनाव एनडीए के नाम पर लड़ा जाना चाहिए। आठों सीटों पर जीत के लिए गठबंधन की पूरी ताकत मैदान में उतारने की रणनीति बनी।


इसी बीच 9 अक्टूबर को एनडीए विधानमंडल दल की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें सांसदों को भी बुलाया गया है। जाहिर है, चुनावी रणनीति के साथ-साथ गठबंधन के भीतर उठ रहे सवालों पर भी वहां चर्चा हो सकती है।


फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इसी बात पर है कि अनंत सिंह का अगला कदम क्या होगा। क्या वह नीरज कुमार के विरोध पर कायम रहेंगे, क्या कोई समझौते का रास्ता निकलेगा या फिर एनडीए नेतृत्व दोनों के बीच की दूरी पाटने में कामयाब होगा? क्योंकि आठ सीटों पर जीत का दावा कर रहे गठबंधन के लिए एक सीट का अंदरूनी विवाद भी चुनावी गणित बिगाड़ सकता है। और सम्राट चौधरी के सवाल ने इस पूरे विवाद को अब और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया है।