PATNA: बिहार के नए सीएम सम्राट चौधरी ने अपने पूर्व उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के बड़े फैसले को पलट दिया है. सम्राट चौधरी की सरकार ने लंबे समय से हड़ताल पर डटे राजस्व कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने निलंबित राजस्व कर्मचारियों को राहत देने का ऐलान किया है। बीते करीब ढाई महीने से निलंबन झेल रहे राजस्व कर्मचारियों का सस्पेंशन अब रद्द किया जाएगा।
बता दें कि 14 अप्रैल तक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का कार्यभार देख रहे पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने इन हड़ताली राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया था. विजय कुमार सिन्हा ने बार बार मनाने और समझाने के बाद भी हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के खिलाफ सख्ती का आदेश दिया था, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी.
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का नया आदेश
अब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल ने सभी जिलों के समाहर्ताओं (डीएम) को आधिकारिक पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच निलंबित किए गए सभी कर्मचारियों का निलंबन समाप्त किया जाए। उन्हें काम पर वापस बुलाया जाए.
200 से ज्यादा कर्मचारियों पर हुआ था एक्शन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आंदोलन के दौरान कुल 224 राजस्व कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। यह कार्रवाई उस समय की गई थी जब कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सामूहिक अवकाश पर चले गए थे और जमीन से जुड़े कामकाज प्रभावित हो गए थे.
हड़ताल से ठप पड़ा था जमीन और प्रशासनिक काम
राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ा। अंचल कार्यालयों में दाखिल-खारिज, भूमि विवाद और म्यूटेशन जैसे काम बुरी तरह प्रभावित हो गया था.
जनगणना कार्य में भी बाधा
आम लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे. वहीं जनगणना के काम में भी बाधा आ रही थी. इसी को देखते हुए सरकार ने सख्ती भी दिखाई और बड़ी संख्या में कर्मचारियों को निलंबित किया गया था।
क्या हैं कर्मचारियों की मांगें?
बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (संयुक्त संघर्ष मोर्चा) के बैनर तले कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगें है -ग्रेड पे में वृद्धि, गृह जिले में तबादला, दाखिल-खारिज प्रक्रिया को आसान बनाना और कार्यालयों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाना.
अधिकारी भी हैं आंदोलन में
केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व अधिकारी (RO) भी 9 मार्च से हड़ताल पर चले थे। हालांकि विभाग की चेतावनी के बाद कुछ अधिकारी काम पर लौट आए, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में अधिकारी हड़ताल पर बने हुए हैं।
आखिरी दिन विजय सिन्हा ने की थी कार्रवाई
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल को इस्तीफा दे दिया था. उस दिन पुरानी सरकार भंग हो गई थी और सारे तत्कालीन मंत्री, उप मुख्यमंत्री की कुर्सी छिन गई थी. लेकिन कुर्सी से हटने से एक दिन पहले विजय कुमार सिन्हा ने बड़े पैमाने पर राजस्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी और उन्हें सस्पेंड कर दिया था.
सरकार का यू-टर्न
अब सम्राट चौधरी की नई सरकार ने यू टर्न मार लिया है. निलंबित कर्मचारियों का सस्पेंशन खत्म किया जा जा रहा है. हालांकि सरकार में बैठे लोग कह रहे हैं कि यह कदम पूरी तरह प्रशासनिक जरूरत और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
हड़ताल से जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्य प्रभावित हो रहे थे
और जनता में नाराजगी बढ़ रही थी. ऐसे में सरकार ने सख्ती से नरमी की ओर रुख किया है. अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या कर्मचारी पूरी तरह काम पर लौटेंगे क्या सरकार उनकी मांगों पर आगे बातचीत करेगी? क्या हड़ताल पूरी तरह खत्म होगी या आंदोलन जारी रहेगा?
क्या और बढ़ेगा भ्रष्टाचार?
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को बिहार का सबसे भ्रष्ट विभाग माना जाता है. आम लोगों का कहना है कि बिना चढ़ावा चढ़ाए इस विभाग में कोई काम नहीं होता. आम लोगों से घुस वसूली करने में कर्मचारियों का सबसे बड़ा रोल रहता है. अब जब सरकार उन्हें ही छूट दे रही है तो उनका हौंसला और बढ़ेगा.