नालंदा: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नालंदा की धरती को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ आज का नालंदा नहीं है, बल्कि प्राचीन भारत की पहचान रहा है। उन्होंने कहा कि नालंदा का गौरव हजारों साल पुराना है और इसे अखंड भारत में मगध के स्वरूप के रूप में जाना जाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि नालंदा का इतिहास भारत की ज्ञान और संस्कृति की विरासत को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के विकास के लिए सरकार कई स्तरों पर काम कर रही है। खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पशुपालन और दुग्ध उत्पादन क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार के गांव-गांव तक दो महत्वपूर्ण सुविधाओं को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे किसानों और पशुपालकों को सीधा लाभ मिल सके।

पशुपालकों के लिए बनेंगे 1000 दवा केंद्र

मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि पशुपालकों की सुविधा के लिए राज्य में पशुओं की दवाओं से जुड़े 1000 केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से गांवों में ही पशुओं के इलाज से जुड़ी जरूरी दवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।उन्होंने कहा कि अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है। सरकार की योजना है कि गांव स्तर पर ही पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए, ताकि पशुपालकों का समय और पैसा दोनों बच सके।

सम्राट चौधरी ने कहा कि पशुपालन बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बड़ी संख्या में परिवार दूध उत्पादन और पशुपालन से जुड़े हैं। ऐसे में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने से पशुओं की उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आय में भी सुधार होगा।

बकरी के दूध को मिलेगा नया बाजार

मुख्यमंत्री ने दूसरा बड़ा लक्ष्य बताते हुए कहा कि बकरी के दूध को फेडरेशन से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि बकरी पालन करने वाले लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा और उनके उत्पाद को बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।उन्होंने कहा कि बकरी का दूध पोषण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर इसे संगठित तरीके से बाजार से जोड़ा जाता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।

नालंदा बनेगा स्वतंत्र दूध उत्पादन संघ

सम्राट चौधरी ने कहा कि नालंदा में जल्द ही एक स्वतंत्र दूध उत्पादन संघ बनाया जाएगा। इससे जिले के दुग्ध उत्पादकों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर व्यवस्था मिलेगी। उन्होंने कहा कि बिहार में डेयरी सेक्टर को लगातार मजबूत किया जा रहा है। दूध उत्पादन बढ़ाने, किसानों को उचित मूल्य दिलाने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की पहचान केवल इतिहास और संस्कृति से नहीं है, बल्कि यहां के मेहनतकश किसान और पशुपालक भी राज्य की ताकत हैं। सरकार का उद्देश्य है कि गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जाए और किसानों की आय बढ़ाई जाए।उन्होंने कहा कि नालंदा जैसे ऐतिहासिक जिले को विकास के नए मॉडल के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। पशुपालन, डेयरी और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देकर बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम जारी रहेगा।मुख्यमंत्री के इन ऐलानों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन क्षेत्र के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। खासकर पशु चिकित्सा सुविधा, बकरी पालन और दूध उत्पादन से जुड़े लोगों को इससे नई उम्मीद जगी है।