Bihar Politics: बिहार में अब नदियों से निकाली जाने वाली गाद (सिल्ट) का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में बिहार सरकार और केंद्र सरकार के बीच समझौता हुआ है। 




मंगलवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में इस योजना को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत बिहार की 27 सड़क परियोजनाओं में करीब 835 लाख घन मीटर गाद के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। वहीं, फिलहाल निर्माणाधीन 16 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लिए 243 लाख घन मीटर गाद मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी।




कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। आपने बिहार की कमजोरी के साथ समझौता किया है, जिसको आप ताकत बनाना चाहते हैं। उन्होंने इस समझौता के लिए नितिन गडकरी का आभार जताया और कहा कि बिहार की दो कमजोरी है। बिहार के लोग अपने पानी से तबाह नहीं है बल्कि दूसरों के पानी से तबाह हैं।





सीएम ने कहा कि बिहार में सात बड़ी नदियां नेपाल से आती हैं। बिहार में बारिश हो या नहीं हो लेकिन अगर नेपाल में बारिश हो गई तो बिहार तबाह होता है। बिहार में 32 प्रतिशत से कम बारिश हुई लेकिन वहां तीन बड़ी नदियों में एचएफएल बदल गया।  गंगा में पिछले दो सौ सालों का हाइएस्ट फ्लड लेबल बदल गया। सोन नदी  और गंडक नदी का एचएफएल बदल गया। तीन बड़ी नदियों का एचएफएल बदलना, प्रतीक है कि नदियों में गाद जमा है।





मुख्यमंत्री ने बताया कि नेपाल में दो बार आपदा आई। नेपाल के पानी के साथ गंडक नदी में गाद बहुत आया। उसी समय गंगा में भी बिहार यूपी और मध्य प्रदेश से 17 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा था। जिससे मास्टर ड्रेन ब्लॉक हो गया। साढ़े पांच लाख क्यूसेक पानी रिवर्स हो गया। जब पानी रिवर्स होता है तो बांध टूटना शुरू हो जाता है। इस दौरान उन्होंने नेपाल से आने वाली विनाशकारी बाढ़ के सभी पहलूओं को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि आबादी और पानी बिहार की दो कमजोरी है।




इस दौरान अपराध पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यहां कोई अपराध नहीं है। अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो गया है। क्राइम हो सकते हैं लेकिन अपराध नहीं है, कोई अपराधी नहीं है। बिहार के लिए सबसे बड़ी दूसरी चुनौती पानी का प्रबंधन है। मैं आस्वस्त करता हूं कि इस नदी संजीवनी समझौता के बाद बिहार आर्थिक रूप से खड़ा होगा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बिहार में चलाए जा रहे तमाम तरह के विकास कार्यों की विस्तृत से जानकारी दी।

रिपोर्ट- नीतीश कुमार, पटना