बिहार की सत्ता में नेतृत्व बदलने के साथ प्रशासनिक तस्वीर भी धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री कार्यालय यानी CMO में पुराने चेहरों की जगह अपनी पसंद और भरोसे वाले अधिकारियों को जिम्मेदारियां देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में रिटायर IAS अधिकारी और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहे दीपक कुमार को अब नई जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया है।


दीपक कुमार 1984 बैच के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं। वह लंबे समय तक नीतीश कुमार के साथ महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों में रहे। 21 मार्च 2021 से वह मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के पद पर थे। अब CMO से उनकी विदाई के साथ प्रशासनिक गलियारों में इसे सम्राट चौधरी की टीम में बदलाव की प्रक्रिया का एक और अहम पड़ाव माना जा रहा है।14 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली। सत्ता संभालने के करीब 169 दिनों के भीतर CMO और उससे जुड़े प्रशासनिक ढांचे में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इनमें नीतीश कुमार के कार्यकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अधिकारियों को अलग-अलग विभागों और संस्थानों में नई जिम्मेदारियां देना भी शामिल है।


दीपक कुमार अकेले ऐसे वरिष्ठ अधिकारी नहीं हैं, जिन्हें सम्राट सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय से बाहर किया गया है। इससे पहले नीतीश कुमार के समय CMO में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अनुपम कुमार अप्रैल 2026 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली चले गए। 2003 बैच के IAS अनुपम कुमार वर्तमान में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं। इसी तरह 2005 बैच के IAS अधिकारी कुमार रवि को मुख्यमंत्री सचिवालय से हटाकर स्वास्थ्य विभाग का सचिव बनाया गया। 2010 बैच के IAS अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सिंह भी CMO से बाहर हुए और उन्हें जल संसाधन विभाग में जिम्मेदारी दी गई। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के OSD रहे IFS अधिकारी डॉ. गोपाल सिंह बिहार से बाहर जा चुके हैं।


इन बदलावों के बीच सम्राट चौधरी की अपनी प्रशासनिक टीम भी आकार ले रही है। 2007 बैच के IAS अधिकारी संजय कुमार सिंह मुख्यमंत्री के सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं। वह गृह विभाग में OSD से लेकर वाणिज्य कर विभाग के सचिव और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। स्वास्थ्य, GST, सामान्य प्रशासन और शिक्षा से जुड़े विभागों में भी उनका अनुभव रहा है। बिहार एजुकेशन प्रोजेक्ट काउंसिल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और बिहार स्टेट एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर की जिम्मेदारी भी वह संभाल चुके हैं।


वहीं 2003 बैच के IAS अधिकारी लोकेश कुमार सिंह मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव हैं। सम्राट सरकार के गठन के साथ ही वह इस पद पर बने हुए हैं। इसके अलावा उनके पास पर्यटन विभाग के सचिव की जिम्मेदारी है और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी है। प्रशासनिक स्तर पर उन्हें फील्ड में काम करने वाले अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। जिलाधिकारी से लेकर सचिव स्तर तक उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग में सचिव के रूप में लोकेश सिंह की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही थी। स्वास्थ्य व्यवस्था, संसाधनों के प्रबंधन और संकट के दौरान प्रशासनिक समन्वय में उनका अनुभव रहा है। ग्रामीण विकास विभाग और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति जैसे संवेदनशील संस्थानों में भी वह काम कर चुके हैं।


हालांकि, सम्राट सरकार में नीतीश कुमार के करीबी रहे सभी अधिकारियों को प्रशासनिक व्यवस्था से पूरी तरह बाहर नहीं किया गया है। इसका उदाहरण 1996 बैच के IAS अधिकारी आनंद किशोर हैं। नीतीश कुमार के कार्यकाल में लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने वाले आनंद किशोर को सम्राट सरकार ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया है।आनंद किशोर करीब एक दशक तक बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष रहे। उनके कार्यकाल में बोर्ड परीक्षाओं में कदाचार और पेपर लीक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए कई कदम उठाए गए। नगर विकास एवं आवास विभाग और वित्त विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी उन्होंने सचिव और प्रधान सचिव स्तर की जिम्मेदारी संभाली है। 


दूसरी ओर, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रहे उदय कांत मिश्रा की भी विदाई हो चुकी है। उनका कार्यकाल 10 सितंबर 2026 को पूरा हुआ। अब इसी प्राधिकरण में दीपक कुमार को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।यानी सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद CMO और उससे जुड़े प्रशासनिक ढांचे में बदलाव एक साथ नहीं, बल्कि धीरे-धीरे हुआ है। कुछ पुराने अधिकारियों को दूसरे महत्वपूर्ण विभागों में भेजा गया, कुछ केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए और कुछ की जगह मुख्यमंत्री की नई टीम के अधिकारियों ने ली। आने वाले समय में CMO में होने वाले अगले बदलावों पर भी प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों की नजर बनी रहेगी।