पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को AI Summit के मंच से सरकारी व्यवस्था को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब समय बदल चुका है और सरकारी संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक के साथ चलना होगा। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विधानसभा के स्टाफ का जिक्र करते हुए कहा कि जो कर्मचारी अब तक कंप्यूटर चलाना नहीं जानते हैं, उन्हें प्रशिक्षित किया जाए और फिर भी सक्षम नहीं होने पर उन्हें हटा दिया जाए। 

AI Summit में संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से आग्रह करते हुए कहा कि जिस तरह विधायकों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, उसी तरह विधानसभा के कर्मचारियों के लिए भी नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल जनप्रतिनिधियों को ही नहीं, बल्कि उनके सहयोगी स्टाफ को भी तकनीक की पूरी जानकारी होनी चाहिए। यदि कोई कर्मचारी विधायक से भी कम कंप्यूटर ज्ञान रखता है, तो ऐसी स्थिति स्वीकार्य नहीं हो सकती।

स्टाफ की क्षमता बढ़ाने पर दिया जोर

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में सरकारी कर्मचारियों का तकनीकी रूप से दक्ष होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विधायक अपने सहयोगियों को इसलिए रखते हैं ताकि वे उनके काम को आसान बना सकें। ऐसे में सहयोगी का ज्ञान जनप्रतिनिधि से बेहतर होना चाहिए। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि कर्मचारियों की नियमित ट्रेनिंग कराई जाए और हर दो महीने पर प्रशिक्षण कक्षाएं आयोजित हों, ताकि सभी कर्मचारी नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग में दक्ष बन सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी सरकार को बेहतर ढंग से चलाने में मंत्रियों की मदद करते हैं, उसी तरह विधानसभा और अन्य सरकारी संस्थानों में कार्यरत सहयोगी स्टाफ की भी मजबूत और प्रशिक्षित व्यवस्था होनी चाहिए।

सोशल मीडिया की समझ भी जरूरी

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि अब केवल कंप्यूटर चलाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया की कार्यप्रणाली को समझना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म कैसे काम करते हैं, जनता के साथ संवाद कैसे स्थापित किया जाता है और डिजिटल माध्यमों पर सरकार की बात लोगों तक कैसे पहुंचाई जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के दौर में जनता से सीधा संवाद सोशल मीडिया के माध्यम से भी होता है, इसलिए सरकारी तंत्र को डिजिटल संचार की पूरी समझ होनी चाहिए।

AI और सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर जताई चिंता

सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उसके दुरुपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज ऐसे कई डिजिटल टूल उपलब्ध हैं जिनके जरिए बिना किसी वास्तविक जनसमर्थन के भी हजारों की संख्या में एक साथ कमेंट या प्रतिक्रियाएं दिखाई जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति एक जगह बैठा हो और उसका कोई वास्तविक योगदान न हो, फिर भी कुछ तकनीकी माध्यमों से हजारों कमेंट एक साथ दिखाई देने लगते हैं। ऐसे हालात में समाज और सरकार दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में जो गलत गतिविधियां डिजिटल माध्यमों से हो रही हैं, उनका मुकाबला भी आधुनिक तकनीक और AI के जरिए ही किया जा सकता है।

"सोशल मीडिया पर बिना प्रमाण के फैल जाती है बात"

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक मीडिया की अपनी विश्वसनीयता होती है और लोग अखबारों में प्रकाशित खबरों को प्रमाणिक मानते हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर कोई भी व्यक्ति कुछ भी लिख सकता है और वह देखते ही देखते लाखों लोगों तक पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि यदि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति के बारे में एक बार गलत बात लिख दी जाए कि वह खराब है, तो लाखों लोग बिना सत्यापन किए उस पर विश्वास करने लगते हैं। वहां तथ्य और प्रमाण की जांच हमेशा नहीं होती। उन्होंने कहा कि यह डिजिटल युग की बड़ी चुनौती है, लेकिन AI आधारित तकनीकों के जरिए ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकता है।

डिजिटल बिहार की दिशा में बड़ा संदेश

AI Summit के मंच से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का यह बयान केवल विधानसभा कर्मचारियों तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे पूरे सरकारी तंत्र को डिजिटल रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिए कि आने वाले समय में सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली में तकनीकी दक्षता, डिजिटल संचार और AI आधारित ज्ञान को प्राथमिकता दी जाएगी। नियमित प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक का उपयोग और सोशल मीडिया की समझ अब सरकारी कार्यप्रणाली का अहम हिस्सा बनने जा रही है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि बिहार सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को डिजिटल और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।