Bihar News: बिहार के सहरसा में साइबर अपराध के एक मामले को लेकर राजनीति गरमा गई है। इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) के विधायक आईपी गुप्ता ने साइबर थाना पुलिस और संबंधित अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विधायक का दावा है कि पुलिस ने एक युवक को साइबर अपराध के मामले में हिरासत में लिया था। उन्होंने खुद पुलिस अधिकारी से युवक को छोड़ने के लिए बात की, लेकिन उस समय उसे नहीं छोड़ा गया। इसके बाद विधायक के मुताबिक, अगले दिन उन्हें जानकारी मिली कि युवक को 2.10 लाख रुपये लेकर छोड़ दिया गया।


विधायक के इस दावे के बाद सहरसा में पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से इस दावे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने की बात खबर में नहीं कही गई है।


फोन किया तो बताया गया- मामला गंभीर है

आईपी गुप्ता ने सोशल मीडिया पर एक पुराने घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह नए-नए विधायक बने थे, तभी सिमरी बख्तियारपुर इलाके से उन्हें फोन आया था। फोन करने वाले ने बताया कि उनके समाज के एक युवक को पुलिस अपने साथ ले गई है।


विधायक के अनुसार, उन्होंने मामले की जानकारी लेने के लिए जांच अधिकारी से संपर्क किया। जांच अधिकारी ने उन्हें डीएसपी से बात करने के लिए कहा। इसके बाद जब उन्होंने डीएसपी से बात की तो उन्हें बताया गया कि युवक पर साइबर अपराध से जुड़ा गंभीर मामला है और उसे छोड़ा नहीं जा सकता।


आईपी गुप्ता का कहना है कि इसके बाद उन्होंने मामले में आगे हस्तक्षेप नहीं किया।


अगले दिन मिली युवक के छूटने की खबर

विधायक के मुताबिक, अगली सुबह उन्हें दोबारा फोन आया। फोन करने वाले ने बताया कि जिस युवक को पुलिस लेकर गई थी, उसे छोड़ दिया गया है।


आईपी गुप्ता ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद उनके फोन करने के बाद पुलिस ने युवक को छोड़ दिया होगा। लेकिन बाद में उन्हें बताया गया कि युवक को कथित तौर पर 2.10 लाख रुपये लेकर छोड़ा गया।


विधायक ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यदि किसी आरोपी को पैसे लेकर छोड़ा जाता है तो इससे कानून-व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।


'पुलिस वाले की फाइल तैयार कर ली'

आईपी गुप्ता ने यह भी दावा किया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही उन्होंने संबंधित पुलिसकर्मी और अधिकारी के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी थी। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारी की पूरी 'कुंडली' तैयार कर ली है।


विधायक ने चेतावनी दी कि वह इस मुद्दे को केवल सहरसा तक सीमित नहीं रखेंगे। उनका दावा है कि विपक्ष में रहते हुए भी वह बिहार में साइबर अपराध से जुड़े मामलों और पुलिस की कार्यशैली की फाइल खोलेंगे।


सड़क जाम और आंदोलन की चेतावनी

आईपी गुप्ता ने सहरसा साइबर थाना पुलिस, डीएसपी और थानेदार के खिलाफ आंदोलन करने की बात कही है। उन्होंने सड़क जाम करने तक की चेतावनी दी है।


विधायक ने साइबर थाना क्षेत्र में दर्ज उन मामलों के शिकायतकर्ताओं से भी सामने आने की अपील की है, जिनकी एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने पार्टी और महागठबंधन के कार्यकर्ताओं से आंदोलन के लिए तैयार रहने की बात भी कही।


अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विधायक द्वारा लगाए गए 2.10 लाख रुपये लेकर युवक को छोड़ने के आरोप की जांच होगी या नहीं। यदि आरोपों की जांच होती है तो उससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। फिलहाल मामला विधायक के आरोपों और पुलिस की कथित कार्यशैली को लेकर उठे सवालों के बीच चर्चा में है।