PATNA:नवनिर्वाचित दो निर्दलीय एमएलसी के भाजपा में शामिल होने पर रोहिणी आचार्य और मनोज झा ने राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी पर जमकर हमला बोला।
बिहार में दो नवनिर्वाचित निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भाजपा का दामन थामने पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने दोनों नेताओं पर जनादेश के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है। वहीं, राज्यसभा सांसद मनोज झा ने दोनों की विधान परिषद सदस्यता खत्म करने की मांग की है।
रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस घटनाक्रम को मौकापरस्ती करार दिया। उन्होंने लिखा, "हद है मौकापरस्ती की।" मतदाताओं ने जिन्हें निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनकर भेजा, वे जीतते ही सत्ता के लोभ में भाजपा की गोद में जा बैठे। यह जनादेश के साथ सीधा धोखा है।
रोहिणी ने आगे लिखा कि जनता ने दोनों उम्मीदवारों को भाजपा के चुनाव चिह्न पर नहीं, बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनकर अपना प्रतिनिधि बनाया था। उनके मुताबिक, इस फैसले से मतदाताओं के भरोसे को ठेस पहुंची है और निजी एवं राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता दी गई है।
इधर, राजद के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने भी दोनों एमएलसी के भाजपा में शामिल होने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे मैंडेट चोरी बताते हुए दोनों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।
मनोज झा ने कहा कि यह जनादेश का अपमान है और जनता के साथ धोखा किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोनों नवनिर्वाचित एमएलसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो राजद इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएगा और उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग करेगा।
राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बिटिया रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ट्वीट करते हुए लिखा कि जनादेश की पीठ में खंजर भोंकने का काम किया गया है। स्वार्थ के लिए लोकतंत्र का सौदा किया गया है। रोहिणी आचार्य आगे लिखती हैं कि " हद है मौकापरस्ती की " मतदाताओं ने जिन्हें निर्दलीय चुनकर भेजा , वो जीतते ही सत्ता के लोभ में बीजेपी की गोद में जा बैठे। यह जनादेश के साथ सीधा धोखा है।
जनता ने इन्हें बीजेपी के सिंबल पर नहीं जिताया था, बल्कि बीजेपी और सत्तापक्ष को सिरे से नकारते हुए इन्हें चुना था, मगर इन मौकापरस्तों ने ये साबित कर दिया कि इनके लिए अपने फायदे के लिए सत्ताधारी दल का साथ और निजी व् राजनीतिक स्वार्थ ही सर्वोपरि है